मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर शिवसेना के भीतर साल 2022 जैसे एक और बड़े और अभूतपूर्व विधिक व राजनीतिक भूचाल के साफ संकेत मिलने लगे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों द्वारा खुली बगावत करने के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक ऐसा बड़ा बयान दिया है, जिसने राज्य के सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि जो कुछ अभी दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ एक ट्रेलर है और पूरी फिल्म आना अभी बाकी है।
उनके इस बयान को शिवसेना (यूबीटी) में संभावित दूसरी बड़ी विधिक टूट और पर्दे के पीछे चल रहे ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में अब यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या उद्धव ठाकरे के हाथों से अब संसदीय दल का नियंत्रण भी पूरी तरह से जाने वाला है।
व्हिप की अवहेलना: संसदीय दल की बैठक से 6 सांसद गायब
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (यूबीटी) द्वारा कड़ा विधिक व्हिप (Whip) जारी किए जाने के बावजूद संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद ही पहुंचे।
- बैठक में उपस्थित सांसद: अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे।
- बगावत का विधिक कदम: बैठक से नदारद रहे 6 बागी सांसदों ने सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र लिखकर संसद में एक अलग समूह (Separate Group) के रूप में मान्यता देने की विधिक मांग कर दी है।
- बगावत का कारण: बागी सांसदों का विधिक तर्क है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा को छोड़ दिया है और कांग्रेस के साथ बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों के कारण जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
दलबदल कानून और दो-तिहाई का विधिक गणित
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) की कुल ताकत 9 सांसदों की है। विधिक रूप से दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की कार्रवाई से बचने के लिए किसी भी बागी गुट को मूल पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है:
चूंकि बागी सांसदों की संख्या ठीक 6 है, इसलिए यह आंकड़ा दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए विधिक रूप से पूरी तरह पर्याप्त है। यही वजह है कि इस कदम को महज एक नाराजगी न मानकर पूरी तरह से सोच-समझकर उठाया गया एक संगठित विधिक और राजनीतिक कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से संसद में शिंदे गुट के सांसदों के साथ ही बैठने की विधिक अनुमति मांगी है।
बागी सांसदों की किलेबंदी: पांच जयपुर और एक पुणे में
पार्टी नेतृत्व के विधिक दबाव और डैमेज कंट्रोल की कोशिशों से बचाने के लिए बागी सांसदों की कड़ी राजनीतिक किलेबंदी (Resort Politics) की गई है:
- जयपुर कैंप: छह बागी सांसदों में से पांच को चार्टर्ड विमान से सीधे जयपुर (राजस्थान) भेज दिया गया है।
- पुणे कैंप: बागी सांसद ओमराजे निंबालकर फिलहाल पुणे में मौजूद हैं और रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। ये सभी सांसद पहले दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर मौजूद थे, जिसके बाद इन्हें अचानक राजस्थान शिफ्ट किया गया, जो दर्शाता है कि इस बगावत के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक ताकत पूरी तरह सक्रिय है।
उद्धव खेमे का विधिक पलटवार और शरद पवार की एंट्री
इस अप्रत्याशित झटके के बाद उद्धव ठाकरे खेमे ने भी बागी सांसदों के खिलाफ कड़ा विधिक रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्य सचेतक और सांसद अरविंद सावंत ने बताया कि व्हिप का उल्लंघन करने वाले सभी अनुपस्थित सांसदों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किए जा रहे हैं। यदि 7 दिनों के भीतर उनका विधिक जवाब नहीं आता है, तो लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी सदस्यता रद्द करने की विधिक याचिका दायर की जाएगी।
शरद पवार का विरोध प्रदर्शन का फॉर्मूला: इस बीच, राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SCP) के प्रमुख शरद पवार ने उनसे इस संकट पर लंबी विधिक व रणनीतिक चर्चा की है। पवार ने सुझाव दिया है कि इन बागी सांसदों के संबंधित संसदीय क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर आक्रामक विरोध प्रदर्शन किए जाएं, और शरद पवार स्वयं इन प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस हस्तक्षेप से साफ है कि शिवसेना की यह अंदरूनी लड़ाई अब महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन के वजूद की लड़ाई बन चुकी है।

