नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Mid-East) में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों पर हुए ताजा हमलों और उसके बाद शुरू हुए भीषण सैन्य टकराव पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को आगाह किया है कि इस बिगड़ते हालात से वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पूरी तरह दांव पर लग गई है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तुरंत युद्ध का रास्ता छोड़कर अधिकतम संयम बरतने की विधिक व कूटनीतिक अपील की है।
1. ताजा विवाद: कमर्शियल टैंकरों पर हमला और ट्रंप का एक्शन
इस नए संकट की शुरुआत रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में हुई:
- तेल टैंकरों पर हमला: जुलाई 2026 की शुरुआत में ईरान समर्थित गुटों द्वारा तीन कमर्शियल तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया।
- अमेरिकी बमबारी: इन हमलों के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी आई और अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से भारी बमबारी शुरू कर दी। साथ ही ईरान के तेल निर्यात पर पूरी तरह विधिक व आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया है।
- ईरान का पलटवार: जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कुवैत और बहरीन पर कई मिसाइलें दाग दी हैं, जिससे पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया है।
2. तबाही से लेकर शांति समझौते के टूटने तक का विधिक व सैन्य घटनाक्रम
अमेरिका और ईरान के बीच वर्ष 2025 से लेकर अब तक उपजे इस महासंकट के मुख्य पड़ावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| समयकाल / तिथि | सैन्य अभियान एवं कूटनीतिक घटनाक्रम | वैश्विक व क्षेत्रीय प्रभाव |
|---|---|---|
| जून 2025 | परमाणु वार्ता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक भारी हवाई हमले हुए। | आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) में पहली बार व्यवधान आया। |
| 28 फरवरी 2026 | अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ (Operation Epic Fury) शुरू किया। | ईरान पर 900 से अधिक हवाई हमले; सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई सैन्य कमांडर मारे गए। |
| मार्च-मई 2026 | ईरान का जवाबी हमला; कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागकर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया। | पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) का गंभीर संकट गहराया। |
| जून 2026 | स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता तथा अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के प्रयासों से शांति समझौता हुआ। | युद्ध विराम और समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर विधिक सहमति बनी। |
| जुलाई 2026 (वर्तमान) | मूल विवाद (परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध) न सुलझने के कारण ईरान समर्थित गुटों ने दोबारा हमले किए; ट्रंप ने फिर शुरू की बमबारी। | जून में हुआ शांति समझौता पूरी तरह टूटने के कगार पर पहुंचा। |
3. संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता: भारत
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने विधिक बयान में इस बात पर विशेष बल दिया है कि इस खतरनाक और विनाशकारी संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता। एमईए के अनुसार, क्षेत्र में शांति बहाली का केवल एक ही स्थायी रास्ता है, और वह है संवाद (Dialogue) तथा कूटनीति (Diplomacy)।भारत के लिए यह संकट इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) काफी हद तक इसी क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर करती है।

