अहमदाबाद: मारपीट और जबरन वसूली के मामले में सात साल की सजा काट रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा के परिवार को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने बुधवार को आप विधायक की पत्नी शकुंतलादेवी वसावा सहित पांच दोषियों की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी। अदालत ने माना कि पहली नजर में इन पांचों के खिलाफ सीधे किसी हिंसक कृत्य का आरोप नहीं है और इनकी भूमिका काफी सीमित थी।
मुख्य आरोपी नहीं माना, मिली ‘विकेरियस लायबिलिटी’ के आधार पर सजा
न्यायमूर्ति वी.के. व्यास की एकल पीठ ने शकुंतलादेवी वसावा, रमेश वसावा, मरियम वसावा, बलिराम वसावा और मोगराबेन वसावा की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ये मामले के मुख्य आरोपी नहीं हैं। शिकायतकर्ता या गवाहों को प्रत्यक्ष रूप से चोट पहुंचाने का आरोप इन पर नहीं है, बल्कि इन्हें ‘विकेरियस लायबिलिटी’ (दूसरों के कृत्य की कानूनी जिम्मेदारी) के आधार पर दोषी ठहराया गया था।
हाईकोर्ट ने जमानत के लिए रखीं ये शर्तें
अदालत ने सभी पांचों दोषियों को निम्नलिखित शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया:
- 15-15 हजार रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करना।
- जमानत अवधि के दौरान किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होना।
- अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर यात्रा न करना।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2023 का है, जब वन विभाग के अधिकारियों के साथ मारपीट और जबरन वसूली का आरोप लगा था। पिछले महीने (जून) निचली सत्र अदालत ने आप विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की कैद और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
विधायक चैतर वसावा ने अब तक नहीं की है अपील
मामले में अब तक कुल छह दोषियों (एक महिला को मानवीय आधार पर पहले जमानत मिली थी) को जमानत मिल चुकी है। हालांकि, मुख्य आरोपी आप विधायक चैतर वसावा और चार अन्य ने अभी तक अपनी सजा पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर नहीं की है। चैतर वसावा फिलहाल नर्मदा केंद्रीय जेल में सजा काट रहे हैं।

