26 दिनों का अनशन खत्म होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक; महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राजघाट
नई दिल्ली: लद्दाख और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर लगातार मुखर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने देश की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर जोरदार प्रहार किया है। उन्होंने देश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों—सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस—को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दोनों दल आलोचकों की आवाज दबाने के लिए एक जैसा ही तरीका अपनाते हैं।
दूसरी ओर, 26 दिनों तक चला अपना अनशन समाप्त करने के बाद सोमवार (27 जुलाई) को सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वे सीधे महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुंचे।
गीतांजलि का तीखा हमला: “दोनों पार्टियों के तरीके एक जैसे”
सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में गीतांजलि जे आंगमो ने लिखा कि देश की पूरी राजनीतिक संस्कृति में गिरावट आ चुकी है:
“अलग-अलग झंडे होने के बावजूद दोनों ही राजनीतिक दलों की कार्यशैली और तरकीबें एक जैसी हैं। भारत को सिर्फ सरकार बदलने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश की पूरी राजनीति का व्याकरण (Vocabulary & Culture) बदलने की सख्त जरूरत है।”
गीतांजलि ने दोनों दलों के समर्थकों की ट्रोलिंग और आलोचनात्मक रवैये पर उदाहरण देते हुए लिखा:
- BJP समर्थकों पर आरोप: जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भाजपा समर्थकों ने उन्हें बिना किसी आधार के ‘देशद्रोही’, ‘चीनी एजेंट’ और ‘विदेशी फंडिंग पाने वाला’ बताकर ट्रॉल किया।
- कांग्रेस समर्थकों पर आरोप: वहीं जब मैंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को केवल दिखावटी और गैर-गंभीर बताया, तो कांग्रेस समर्थकों ने मुझे तुरंत ‘संघी’ और ‘भाजपा का चमचा’ कहना शुरू कर दिया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि असहमति का जवाब संवाद और बातचीत से दिया जाना चाहिए, न कि किसी को बदनाम करके। “देशभक्ति को किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति वफादारी से नहीं, बल्कि सत्य और ईमानदारी से मापा जाना चाहिए।”
अनशन खत्म होने के बाद राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर सफदरजंग अस्पताल से एक निजी अस्पताल स्थानांतरित किए गए सोनम वांगचुक को सोमवार को छुट्टी मिल गई। 26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद अस्पताल से बाहर आते ही वांगचुक सबसे पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे।
राजघाट पर मीडिया से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा:
“100 साल पहले महात्मा गांधी द्वारा दिखाया गया सत्याग्रह और अहिंसा का रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक और सच्चा है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, और लोकतंत्र में इसका सम्मान किया जाना चाहिए।”

