गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में दी जानकारी; राज्यों को मिली 132.93 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद
नई दिल्ली:
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत संचालित ‘सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (CFCFRMS) साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने में एक अत्यंत प्रभावी हथियार साबित हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह विस्तृत जानकारी दी।
वर्ष 2021 में शुरू किए गए इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना और साइबर अपराधियों द्वारा ठगी गई रकम को विड्रॉ होने से पहले ब्लॉक करना है।
CFCFRMS और 1930 हेल्पलाइन की मुख्य उपलब्धियां
30 जून 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- बचाई गई कुल राशि: 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में समय पर कार्रवाई करते हुए 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी गई राशि को डूबने से बचाया गया है।
- 1930 हेल्पलाइन: साइबर फ्रॉड की तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ संचालित किया जा रहा है।
- 25,698 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन पर रोक: बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10 सितंबर 2024 को शुरू की गई ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ के तहत 30.48 लाख से अधिक संदिग्धों का डेटा और 32.08 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स (फर्जी/डमी खाते) दर्ज किए गए हैं। इसके जरिए 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन को रोका गया है।
नए मॉड्यूल्स और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)
साइबर क्राइम शिकायतों को संभालने में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए गृह मंत्रालय ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है:
- मनी रेस्टोरेशन और ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल: पीड़ितों को उनकी ठगी गई रकम तेजी से वापस दिलाने (Money Restoration) और गलती से फ्रीज हुए खातों/लियन मार्किंग की शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए अप्रैल 2026 से यह सुविधा चालू कर दी गई है।
- अंतरराष्ट्रीय एकीकरण: CFCFRMS प्लेटफॉर्म पर 30 जून 2026 तक भारत में काम कर रहे 40 विदेशी बैंकों सहित कुल 1,586 संस्थाओं/बैंकों को जोड़ा जा चुका है।
राज्यों की क्षमता निर्माण और साइबर फॉरेंसिक का विस्तार
गृह मंत्रालय ने साइबर जांच और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं:
- 132.93 करोड़ रुपये की सहायता: ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (CCPWC)’ योजना के तहत 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फॉरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
- प्रशिक्षण: 24,600 से अधिक पुलिस अधिकारियों, जांच अधिकारियों, सरकारी वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को साइबर फॉरेंसिक व जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट सेंटर: नई दिल्ली (स्थापना 2019) और असम (स्थापना 29 अगस्त 2025) में अत्याधुनिक सपोर्ट सेंटर स्थापित किए गए हैं। अकेले नई दिल्ली केंद्र ने 14,064 से अधिक जटिल साइबर मामलों में राज्य पुलिस एजेंसियों को फॉरेंसिक मदद पहुंचाई है।
- CERT-In द्वारा AI का उपयोग: CERT-In द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित ऑटोमेटेड थ्रेट इंटेलिजेंस एक्सचेंज के जरिए खतरनाक डोमेन और फ़िशिंग गतिविधियों का पता लगाकर अलर्ट जारी किए जा रहे हैं।

