मुंबई/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर एक बेहद बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत में नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा है कि दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। समझौते का 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अब केवल ‘एक प्रतिशत’ (1%) तकनीकी औपचारिकताएं बाकी हैं। मुंबई में आयोजित हाई-प्रोफाइल ‘सिटी 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में राजदूत ने स्पष्ट किया कि दोनों लोकतांत्रिक देश इस डील को लेकर बेहद आशावादी हैं और यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का रुख बदलने वाली साबित होगी।
मार्को रूबियो का भारत दौरा और TRUST पहल की सफलता
सर्जियो गोर ने दोनों देशों के प्रगाढ़ होते कूटनीतिक रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका की साझेदारी केवल सामान्य आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में पूरी दुनिया की रणनीतिक दिशा तय करेगी। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के हालिया चार दिवसीय भारत दौरे का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि यह यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि वाशिंगटन नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों को कितनी गंभीरता और गहराई से देखता है।
राजदूत ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में शुरू की गई ‘TRUST’ (ट्रस्ट) पहल रंग ला रही है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, सुरक्षित सप्लाई चेन और दवा उद्योग (फार्मा सेक्टर) में दोनों देश मिलकर अभूतपूर्व काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में अमेरिका में उपयोग होने वाली कुल जेनेरिक दवाओं का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा सीधे भारत से निर्यात किया जाता है।
नागरिक परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर महासौदा
व्यापारिक रिश्तों से इतर, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। राजदूत गोर के अनुसार, दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy) क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम दे रहे हैं, जिसका सकारात्मक असर आने वाले दशकों में दिखेगा। इसके अलावा, दोनों देशों ने हाल ही में ‘क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ (Critical Minerals Framework) पर भी अंतिम हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक फ्रेमवर्क का प्राथमिक उद्देश्य भविष्य की हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की निर्बाध और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
सप्लाई चेन से चीन के एकाधिकार को तोड़ने की तैयारी
अमेरिकी राजदूत ने बिना किसी देश का सीधा नाम लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर एक ऐसे सुरक्षित, पारदर्शी और बहुपक्षीय सप्लाई चेन नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं जो किसी भी एकल देश के दबदबे या एकाधिकार (Monopoly) पर वैश्विक निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर सके। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों का यह कदम सीधे तौर पर वैश्विक विनिर्माण और सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार को कड़ी चुनौती देने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

