प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक हुईं पूर्व प्रधानमंत्री; कहा—’2024 के छात्र आंदोलन को हिंसक हथियार की तरह किया गया इस्तेमाल’
नई दिल्ली:
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में दो साल के निर्वासन के बाद अपने देश लौटने की इच्छा जाहिर की है। बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक ऑडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वे इस साल (2026) के अंत तक बांग्लादेश वापस जाना चाहती हैं, क्योंकि वहां की जनता सुरक्षा, शांति और आर्थिक प्रगति की हकदार है।
संबोधन के दौरान वे कई बार भावुक हुईं और कहा कि वे सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को फिर से विकास और धर्मनिरपेक्षता की सही राह पर लाने के लिए वापस लौटेंगी।
‘जुलाई-अगस्त 2024 का आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं था’
शेख हसीना ने वर्ष 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन और अपनी सरकार के तख्तापलट को याद करते हुए गंभीर आरोप लगाए:
- छात्रों के पीछे संगठित समूह: उन्होंने कहा कि जुलाई-अगस्त 2024 का आंदोलन कोई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नहीं था। उनकी सरकार ने छात्रों को बातचीत के लिए प्रधानमंत्री आवास बुलाया और मंत्रियों ने भी चर्चा की, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने आरक्षण सुधार की मांग को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया।
- इस्तीफे का षड्यंत्र: उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चे छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल कर योजनाबद्ध तरीके से झूठा प्रचार फैलाया गया और इस आंदोलन को उनके इस्तीफे के एकसूत्रीय अभियान में बदल दिया गया।
बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर जताई चिंता
| मुद्दा | शेख हसीना का वक्तव्य / दावा |
| वापसी का मकसद | देश को विकास, प्रगति, धर्मनिरपेक्षता और स्थिरता के रास्ते पर वापस लाना। |
| वर्तमान सरकार पर हमला | उन्होंने कहा कि चुनाव में धांधली के बाद सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के शासन में जनता आज भी डर और आर्थिक तंगी में जी रही है। |
| 1971 का संदर्भ | हसीना ने कहा कि मौजूदा बांग्लादेश वैसा बिल्कुल नहीं है जैसा 1971 के मुक्ति संग्राम में 30 लाख शहीदों के बलिदान के बाद बनाया गया था। |
‘जनता ही मेरी ताकत’
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी वापसी की सटीक तारीख बाद में तय की जाएगी, लेकिन वे अपने देशवासियों के पास जरूर जाएंगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जनता ही मेरी ताकत का एकमात्र स्रोत है। मुझे उन पर अटूट विश्वास है और मैं सिर्फ उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए उनके बीच खड़े होने आऊंगी।”

