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Tuesday, June 2, 2026

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वंदे मातरम के सभी 5 पदों को बार-बार गाना ‘अनावश्यक दबाव’: कांग्रेस सांसद शशि थरूर; केरल के राज्यपाल संग विवाद पर बोले- मामला जा सकता है कोर्ट

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे हालिया विवाद पर सोमवार (1 जून 2026) को एक बेहद बड़ा और बेबाक बयान दिया है। थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी आधिकारिक या सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरुआत और अंत— दोनों समय वंदे मातरम के सभी पांचों पदों (पूरे संस्करण) को अनिवार्य रूप से गाने के लिए मजबूर करना पूरी तरह ‘अनावश्यक और लोगों पर अनुचित दबाव डालने वाला’ कदम है।

केरल सरकार और राज्यपाल के बीच छिड़ा विवाद

पत्रकारों से बातचीत करते हुए शशि थरूर ने केरल सरकार और राज्य के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच इस मुद्दे पर चल रहे वैचारिक मतभेद को उजागर किया। थरूर ने कहा कि केरल सरकार का रुख बेहद स्पष्ट है कि कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम गाना पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) होना चाहिए, जबकि राज्यपाल का दृष्टिकोण इससे बिल्कुल अलग और इसे अनिवार्य बनाने का है।

सांसद ने कहा, “चूंकि देश की संसद ने राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर ऐसा कोई लिखित कानून नहीं बनाया है, इसलिए यह मामला अधिकतर परंपरा और आपसी सम्मान का विषय रहा है। राज्यपाल और सरकार के बीच का यह विवाद आखिरकार कानूनी रूप से कोर्ट में जाकर ही तय हो सकता है।”

‘छोटे कार्यक्रमों में दो बार पूरा गीत बजाना अ व्यावहारिक’

शशि थरूर ने एक हालिया पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जहाँ नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम के प्रारंभ और समापन दोनों ही समय पूरा वंदे मातरम गीत बजाया गया था। उन्होंने दर्शकों की व्यावहारिक परेशानी साझा करते हुए कहा, “वंदे मातरम हमारा गौरवशाली राष्ट्रीय गीत है और हम सभी इसका दिल से सम्मान करते हैं। मैं खुद इसे आपके सामने खुशी-खुशी गा सकता हूँ। लेकिन किसी छोटे कार्यक्रम में दर्शकों के लिए इतने लंबे और कम परिचित पांचों पदों के गीत को दो-दो बार सुनकर लगातार खड़े रहना बेहद कठिन और अव्यावहारिक हो जाता है।”

राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री की मौजूदगी में गाएं, बाकी जगह तय हिस्सा ही काफी

थरूर ने सुझाव देते हुए कहा कि वह केवल बड़े संवैधानिक और औपचारिक अवसरों पर— जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की उपस्थिति में पूरे गीत (सभी 5 पदों) के गायन की औचित्य को समझ सकते हैं। लेकिन हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में इसे थोपना सही नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वंदे मातरम का जो पहला पद या शुरुआती हिस्सा आमतौर पर गाया जाता है, वह राष्ट्रगान (जन गण मन) के बराबर समय का होता है। इसे देश में लंबे समय से सहर्ष स्वीकार किया जाता रहा है और पूरा सम्मान दिया जाता रहा है। थरूर ने इस पूरे विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि इसका कोई तार्किक समाधान आपसी सहमति से जल्द निकाल लिया जाएगा।

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