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Sunday, June 14, 2026

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असम में ‘हेरिटेज ड्रिंक्स’ को मिला कानूनी कवच: असम आबकारी (संशोधन) नियम 2026 अधिसूचित; जनजातीय पारंपरिक पेय पदार्थों को मिलेगा वैश्विक बाजार

गुवाहाटी: असम सरकार ने राज्य के राजस्व को बढ़ाने और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा विनियामक कदम उठाया है। असम के आबकारी (Excise) क्षेत्र में बड़े और व्यापक सुधारों को अमलीजामा पहनाते हुए राज्य सरकार ने पारंपरिक और विरासत से जुड़े मादक पेय पदार्थों (Heritage Alcoholic Beverages) को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और उनके व्यावसायिक उत्पादन व बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं।

माननीय राज्यपाल की आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद, असम सरकार के आबकारी विभाग ने “असम आबकारी (संशोधन) नियम, 2026” (Assam Excise Amendment Rules 2026) की गजट अधिसूचना आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है।

संशोधन का मुख्य उद्देश्य: अवैध शराब पर रोक और पारंपरिक कला को सम्मान

आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस नए संशोधन को लागू करने के पीछे असम सरकार के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक उद्देश्य शामिल हैं:

  • कानूनी सुरक्षा और विनिर्माण: असम के विभिन्न स्वदेशी जनजातीय समुदायों (जैसे बोडो, मिशिंग, कारबी और राभा) द्वारा पीढ़ियों से घरों में बनाए जाने वाले पारंपरिक चावल से निर्मित पेय पदार्थों (जैसे जूडी, साईं मोद आदि) को अब एक वैध ‘हेरिटेज ड्रिंक’ का कानूनी दर्जा मिलेगा।
  • व्यावसायिक बढ़ावा: कुटीर उद्योगों और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को इसके व्यावसायिक विनिर्माण (Commercial Manufacturing), पैकेजिंग और ब्रांडिंग के लिए आबकारी लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जिससे वे इन्हें वैध बाजारों और वाइन शॉप्स पर बेच सकेंगे।
  • जहरीली शराब पर नकेल: पारंपरिक शराब को कानूनी और सुरक्षित दायरे में लाकर सरकार का लक्ष्य बाजार में बिकने वाली असुरक्षित, गैर-मानकीकृत और अवैध जहरीली शराब (Chulai) के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना है।

स्थानीय रोजगार और पर्यटन को मिलेगी जबरदस्त रफ्तार
इस नीतिगत सुधार के बाद असम के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में स्थानीय रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे। पारंपरिक रूप से पेय बनाने की कला में माहिर ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों को अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, असम आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए इन ‘हेरिटेज ड्रिंक्स’ को गोवा की ‘फेनी’ (Feni) या जापान की ‘साके’ (Sake) की तर्ज पर एक सांस्कृतिक यूएसपी (USP) के रूप में प्रमोट किया जाएगा, जिससे राज्य के पर्यटन और आबकारी राजस्व में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।

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