मुंबई: सांसदों की बगावत की अटकलों और राजनीतिक उठापटक की खबरों के बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को देश के सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में एक बड़ा विधिक झटका लगा है। मुंबई में एक आधिकारिक जाति जांच समिति (Caste Scrutiny Committee) द्वारा जाति प्रमाण पत्र को अमान्य (Invalid) किए जाने के बाद शिवसेना यूबीटी के एक मौजूदा पार्षद को विधिक रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने गुरुवार को बीएमसी की आम सभा (General Body Meeting) की बैठक में औपचारिक रूप से घोषणा की कि कांजुरमार्ग के वार्ड नंबर 111 से निर्वाचित पार्षद दीपक सावंत की सदस्यता विधिक रूप से समाप्त कर दी गई है और उनकी सीट अब खाली हो गई है।
रत्नागिरी जिला जाति जांच समिति की रिपोर्ट बनी अयोग्यता का विधिक आधार
मेयर रितु तावड़े ने सदन को सूचित किया कि बीएमसी प्रशासन को रत्नागिरी की जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति द्वारा जारी उस अंतिम विधिक आदेश की आधिकारिक प्रति प्राप्त हो गई है, जिसमें दीपक सावंत के पिछड़े वर्ग के दावे को खारिज करते हुए उनके जाति प्रमाण पत्र को अमान्य कर दिया गया था।
- OBC आरक्षित सीट का मामला: दीपक सावंत ने बीएमसी का चुनाव वार्ड नंबर 111 से लड़ा था, जो कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए विधिक रूप से आरक्षित थी।
- सदन में संख्या बल घटा: सावंत की विधिक सदस्यता समाप्त होने के साथ ही मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना (UBT) की ताकत 65 से घटकर 64 रह गई है।
AIMIM पार्षद समीर रमजान पटेल भी जांच के घेरे में; कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
दीपक सावंत के साथ-साथ गोवंडी इलाके के वार्ड नंबर 137 से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के टिकट पर चुने गए पार्षद समीर रमजान पटेल को भी ठीक इसी तरह की विधिक स्थिति का सामना करना पड़ा है।
मीर पटेल ने भी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सीट से ही चुनाव जीता था, लेकिन अहिल्यानगर (पूर्व नाम अहमदनगर) जिले की जाति जांच समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को भी विधिक रूप से अमान्य घोषित कर दिया था। बीएमसी की इस आम सभा में पटेल की अयोग्यता की घोषणा भी तय मानी जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर एक सक्षम अदालत ने जांच समिति के आदेश पर विधिक रोक (Stay Order) लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दे दी। इस विधिक रोक के चलते वे अगले न्यायिक आदेश तक पार्षद पद पर बने रहेंगे।
आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने के कड़े विधिक नियम
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई नगर निगम अधिनियम के तहत यदि कोई उम्मीदवार किसी आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) की सीट से चुनाव जीतता है, तो उसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर राज्य की अधिकृत स्क्रूटनी कमेटी से अपने जाति प्रमाण पत्र की वैधता (Validity Certificate) प्रस्तुत करनी होती है। यदि जांच समिति दस्तावेजों की विसंगति के कारण प्रमाण पत्र को अमान्य कर देती है, तो संबंधित जनप्रतिनिधि का चुनाव विधिक रूप से स्वतः अमान्य (Null and Void) हो जाता है।
दीपक सावंत के मामले में रत्नागिरी समिति के फैसले के बाद बीएमसी ने यह कड़ा विधिक कदम उठाया है, जिसने मुंबई की स्थानीय राजनीति में एक बार फिर आरक्षित सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर विधिक बहस छेड़ दी है।

