मुस्लिम अधिकारियों से भेदभाव के आरोप पर विवाद, टीएमसी विधायक दल के भीतर भी नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर साइबर अपराध पुलिस ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका से जुड़े एक मामले में उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया है। पुलिस ने मोइत्रा को शनिवार सुबह 11 बजे उपस्थित होने का समन भेजा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दर्ज प्राथमिकी में कुछ गैर-जमानती धाराएं भी शामिल की गई हैं।
स्थानीय नागरिक की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला डायमंड हार्बर के एक स्थानीय निवासी ने महुआ मोइत्रा के पोस्ट को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी टिप्पणियों से सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है और तनाव भड़कने की आशंका है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इसी शिकायत का संज्ञान लेते हुए साइबर क्राइम थाने में औपचारिक मामला दर्ज किया गया है और पोस्ट के संदर्भ व दावों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट और भेदभाव के आरोप से जुड़ा विवाद विवाद का कारण 1 सितंबर को की गई महुआ मोइत्रा की वह पोस्ट है, जिसमें उन्होंने राज्य में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक कार्यक्रम का उल्लेख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य प्रशासन में कार्यरत मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को जानबूझकर इस आयोजन से अलग रखा गया या आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या अधिकारियों के धर्म के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया गया, साथ ही पोस्ट में कुछ अधिकारियों के नामों का भी जिक्र किया था।
शनिवार को साइबर सेल के समक्ष पेशी पुलिस द्वारा जारी समन के तहत सांसद को शनिवार सुबह 11 बजे डायमंड हार्बर साइबर अपराध शाखा के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयानों और पोस्ट के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा। पूछताछ और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी।
तृणमूल विधायक दल में भी नेतृत्व को लेकर हलचल दूसरी तरफ, पार्टी के 80 सदस्यीय विधायक दल में अंदरूनी खींचतान भी सामने आई है। करीब 65 विधायकों ने ऋतब्रत के नेता प्रतिपक्ष पद के दावे का समर्थन करते हुए आधिकारिक खेमे के उम्मीदवार को स्वीकार करने से मना कर दिया। असंतुष्ट विधायकों की एक विशेष बैठक में वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना गया तथा एक समानांतर राष्ट्रीय नेतृत्व ढांचे की घोषणा की गई, जिससे पार्टी की आंतरिक राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है।

