सीबीआई द्वारा 3 साल बाद भी चार्जशीट दाखिल न होने को बनाया आधार, जांच एजेंसी ने कहा- आरोपी को नहीं मिल सकती छूट
मुंबई: 538 करोड़ रुपये के कथित केनरा बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में जेट एयरवेज के 77 वर्षीय संस्थापक नरेश गोयल ने अदालत से खुद को बरी (डिस्चार्ज) करने की गुहार लगाई है। विशेष अदालत में दाखिल अपनी अर्जी में गोयल ने दलील दी है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के तीन साल बीत जाने के बावजूद एजेंसी अब तक कोई आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं कर पाई है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मांग का पुरजोर विरोध करते हुए अदालत में स्पष्ट किया कि सीबीआई की चार्जशीट में देरी किसी भी तरह से आरोपी को राहत देने का आधार नहीं बन सकती।
ईडी ने नरेश गोयल को इस पूरे वित्तीय हेरफेर का ‘मुख्य रणनीतिकार’ करार दिया है, जिनकी योजना के तहत कंपनी के धन को खुर्द-बुर्द किया गया।
‘नहीं हुई कोई हेराफेरी, कारोबारी वजहों से डूबी एयरलाइन’ नरेश गोयल ने याचिका के जरिए फंड डायवर्जन के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बैंक कंसोर्टियम पहले ही अपनी बकाया वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। उन्होंने दलील दी कि जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति उनके किसी गलत कृत्य से नहीं, बल्कि किफायती एयरलाइंस से मिली कड़ी प्रतिस्पर्धा और विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों जैसे बाहरी कारणों से बिगड़ी थी।
गोयल ने यह भी तर्क दिया कि कानूनन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) का मामला किसी ‘शेड्यूल ऑफेंस’ (मूल अपराध) पर ही टिक सकता है। चूंकि सीबीआई इतने वर्षों में किसी अपराध या ‘क्राइम प्रोसीड्स’ को साबित नहीं कर सकी है और न ही किसी लोक सेवक को आरोपी बनाया गया है, ऐसे में यह केस जारी रखना अनुचित है।
ईडी का रुख: विदेशी ट्रस्टों में भेजा गया पैसा जांच एजेंसी ईडी ने अदालत में दलील दी कि सीबीआई ने अभी तक गोयल को क्लीन चिट नहीं दी है, इसलिए चार्जशीट में देरी के आधार पर मामला बंद नहीं किया जा सकता। ईडी का आरोप है कि परिचालन खर्चों और बकाये को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और कारोबारी लेन-देन की आड़ में कंपनी की संपत्तियों को चालाकी से विदेशी ट्रस्टों और नजदीकी लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया। एजेंसी ने कहा कि आरोपी के कृत्यों से देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिति का दिया हवाला सितंबर 2023 में गिरफ्तार हुए और 2024 से स्वास्थ्य आधार पर जमानत पर चल रहे गोयल ने अपनी नई अर्जी में गिरते स्वास्थ्य और पत्नी अनीता गोयल के निधन के बाद उपजे मानसिक अवसाद का भी उल्लेख किया है। वित्तीय ब्योरा देते हुए उन्होंने दावा किया कि केनरा बैंक से स्वीकृत 538.62 करोड़ रुपये में से 365.57 करोड़ रुपये ‘नॉन-फंड बेस्ड’ (एलसी) थे, जिसका भुगतान सीधे वेंडरों, एयरपोर्ट ऑपरेटरों और तेल कंपनियों को हुआ था। अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज अर्जी पर आगामी दिनों में फैसला लेगी।

