नई दिल्ली: देश की आंतरिक सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को अत्याधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू किया है। मंत्रालय देश के करीब 30 लाख पुलिसकर्मियों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और आपदा राहत दलों को एक साझा एवं सुरक्षित संचार सूत्र में पिरोने के लिए ‘देशव्यापी समर्पित पब्लिक सेफ्टी ब्रॉडबैंड नेटवर्क’ विकसित करने जा रहा है।
इस प्रस्तावित नेटवर्क के तकनीकी ढांचे, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मॉडल को लेकर गृह मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से उद्योग विशेषज्ञों, तकनीकी कंपनियों और आम नागरिकों से सुझाव मांगे हैं।
हाई-स्पीड डेटा, वीडियो और वॉइस की एकीकृत सुविधा
वर्तमान में पुलिस और सुरक्षा बल मुख्यतः पारंपरिक वायरलेस नेटवर्क (VHF/UHF और TETRA) पर निर्भर हैं, जो प्राथमिक रूप से केवल वॉयस कॉल तक सीमित हैं। नए ब्रॉडबैंड नेटवर्क के लागू होने से सुरक्षा तंत्र को निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी:
- रियल-टाइम वीडियो स्ट्रीमिंग: कानून-व्यवस्था की संवेदनशील स्थितियों, दंगा नियंत्रण और वीआईपी सुरक्षा के दौरान फील्ड से सीधे मुख्यालय और कंट्रोल रूम तक लाइव हाई-डेफिनिशन वीडियो फीड।
- त्वरित आपदा प्रबंधन: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा राहत बलों (SDRF) के बीच समन्वय और तेज होगा। बाढ़, भूकंप या चक्रवात जैसी आपदाओं में मैप, सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस (GIS) डेटा तुरंत साझा किया जा सकेगा।
- एन्क्रिप्टेड व सुरक्षित चैनल: आपातकाल के दौरान वाणिज्यिक सेलुलर नेटवर्क पर भीड़भाड़ या नेटवर्क ठप होने की स्थिति में भी यह समर्पित नेटवर्क बिना किसी रुकावट के काम करेगा।
अंतर-एजेंसी समन्वय में मील का पत्थर
इस नेटवर्क का सबसे बड़ा लाभ अंतर-एजेंसी समन्वय (Interoperability) होगा। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और केंद्रीय बलों (जैसे CRPF, BSF, CISF) के संचार प्लेटफॉर्म अलग-अलग प्रारूपों पर काम करते हैं। यह साझा ब्रॉडबैंड नेटवर्क सभी एजेंसियों को एक समान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर सूचनाओं के आदान-प्रदान में लगने वाले समय को न्यूनतम करेगा।
हितधारकों से मांगे तकनीकी सुझाव
गृह मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श पत्र के अनुसार, नेटवर्क के लिए अत्याधुनिक 4G/5G LTE तकनीक, सैटेलाइट-टेरेस्ट्रियल हाइब्रिड मॉडल, दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में कवरेज और सख्त साइबर सुरक्षा मानकों पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्राप्त फीडबैक के आधार पर नेटवर्क के अंतिम विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और कार्यान्वयन रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

