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Thursday, May 28, 2026

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सिक्किम में महिला सशक्तीकरण की नई उड़ान: राष्ट्रपति ने गंगटोक में शुरू की ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’, महिला चालक और स्टाफ संभालेंगे कमान

गंगटोक: सिक्किम में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में महिलाओं के लिए विशेष पिंक सिटी रनर ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ की आधिकारिक शुरुआत की। इस बस सेवा की सबसे बड़ी और अनूठी खासियत यह है कि इन बसों का पूरा नियंत्रण और संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में होगा— यानी बस की चालक (Driver) से लेकर पूरा सहयोगी स्टाफ (Conductor & Staff) केवल महिलाएं ही होंगी।

राज्य सरकार ने इस पिंक बस सेवा को महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment) और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है।

रिज पार्क में भव्य समारोह, 12 किमी का होगा सफर

गंगटोक के खूबसूरत रिज पार्क में आयोजित इस गरिमामयी और भव्य उद्घाटन कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (पी.एस. गोले) भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

रूट और किराये का विवरण:

यह विशेष महिला बस सेवा गंगटोक के रणीपूल से लेकर सचिवालय (Secretariat) तक के करीब 12 किलोमीटर लंबे व्यस्त मार्ग पर संचालित की जाएगी। कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और आम महिला यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इस पूरे सफर का किराया बेहद किफायती मात्र 25 रुपये नियत किया गया है।

‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ की मुख्य विशेषताएं

महिला यात्रियों को सुरक्षित, आधुनिक और आरामदायक सफर का अहसास कराने के लिए इन बसों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

पैरामीटर / सुविधाविवरण और जानकारी
बस सेवा का आधिकारिक नामआमा दिदी बहिनी बस सेवा (Pink City Runner)
निर्धारित मार्ग (Route)रणीपूल से सचिवालय (गंगटोक)
यात्रा की कुल दूरीकरीब 12 किलोमीटर
सफर का किराया₹25 मात्र
संचालन टीमशत-प्रतिशत महिला चालक और महिला स्टाफ
अत्याधुनिक सुरक्षा एवं सुविधासीसीटीवी कैमरे (CCTV), पूर्ण एयर कंडीशनिंग (AC), मोबाइल चार्जिंग पॉइंट्स

“भीड़भाड़ और असहजता से मिलेगी मुक्ति” — मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग

बस सेवा के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि राज्य की प्रत्येक महिला और बेटी को सुरक्षित व सस्ती परिवहन सुविधा देना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर कॉलेज की छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को भीड़भाड़ वाली सामान्य बसों में सफर के दौरान सुरक्षा को लेकर असहजता और चिंता का सामना करना पड़ता था।

यह नई और समर्पित बस सेवा उनके इस डर और परेशानी को पूरी तरह खत्म कर देगी। सरकार का दृढ़ विश्वास है कि जब परिवहन सुरक्षित और सुलभ होगा, तो राज्य की महिलाएं शिक्षा, रोजगार, व्यापार और सामाजिक गतिविधियों में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी भागीदारी दर्ज करा सकेंगी, जो लैंगिक समानता (Gender Equality) के लिए बेहद जरूरी है।

महिला यात्रियों और छात्राओं में भारी उत्साह

बस सेवा के पहले ही दिन सफर करने वाली कॉलेज की छात्राओं और कामकाजी महिलाओं ने इस पहल पर बेहद खुशी और संतोष जाहिर किया।

यात्रियों की प्रतिक्रिया:

“सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए इस तरह की सुरक्षित और अलग व्यवस्था की लंबे समय से आवश्यकता थी। जब बस की स्टीयरिंग व्हील और टिकट चेकिंग काउंटर पर महिलाएं ही मौजूद हैं, तो हमारा आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव कई गुना बढ़ जाता है। अब हम बिना किसी डर या हिचकिचाहट के देर शाम तक भी सफर कर सकती हैं।”

भविष्य का विजन:

सिक्किम सरकार के सूत्रों के अनुसार, गंगटोक में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और समीक्षा के बाद, भविष्य में राज्य के अन्य प्रमुख शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में भी इसी तर्ज पर ‘आमा दिदी बहिनी बस सेवा’ का विस्तार किया जाएगा। देश में महिला सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सिक्किम का यह अनूठा ‘पिंक मॉडल’ अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण साबित हो सकता है।

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