पुणे: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी 2026’ (NEET-UG) के पेपर लीक और धांधली को लेकर देश भर में जारी सियासी और सामाजिक घमासान के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने एक बड़ा बयान दिया है। पुणे में शनिवार को आयोजित एक जनसभा के दौरान पवार ने आधुनिक तकनीकों की वकालत करते हुए कहा कि यदि परीक्षा के संचालन और इसकी सुरक्षा में समय रहते आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का सही ढंग से इस्तेमाल किया गया होता, तो आज देश के लाखों छात्रों को इस मानसिक तनाव और संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
जांच अधिकारी की ईमानदारी पर जताया भरोसा; कहा- दो महीने में दिखेंगे नतीजे
एनटीए (NTA) और नीट पेपर लीक की जारी जांच के बीच शरद पवार का एक अलग और सकारात्मक रुख भी देखने को मिला। उन्होंने किसी का सीधा नाम लिए बिना इस मामले की कमान संभाल रहे एक शीर्ष वरिष्ठ अधिकारी का खुलकर बचाव किया। शरद पवार ने अतीत के दिनों को याद करते हुए कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे मामले की कमान और जांच की जिम्मेदारी वर्तमान में जिस वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है, वे पूर्व में मेरे साथ (प्रशासन में) काम कर चुके हैं। वे बेहद ईमानदार और कर्मठ अधिकारी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि अगले दो महीनों के भीतर उनकी मेहनत और निष्पक्ष जांच के परिणाम देश के सामने आ जाएंगे।”
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल; अनुजा बापट और रुचिरा विज बनीं संयुक्त सचिव
गौरतलब है कि आगामी 21 जून 2026 को होने जा रही नीट की पुनर्परीक्षा (Re-Exam) को पूरी तरह पारदर्शी और लीक-प्रूफ बनाने के लिए केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए हैं। सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए दो महिला अधिकारियों— अनुजा बापट (ISS) और रुचिरा विज (IRS) को एनटीए के भीतर नया संयुक्त सचिव (Joint Secretary) नियुक्त कर परीक्षा की पूरी कमान सौंप दी है। दूसरी तरफ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस पूरे विवाद को लेकर नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
सीबीआई अब तक 13 आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार
आपको बता दें कि 3 मई को देश-विदेश के सैकड़ों केंद्रों पर आयोजित हुई नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को देशव्यापी विरोध और पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद 12 मई को केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह रद्द कर दिया गया था। इस हाई-प्रोफाइल रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था। सीबीआई की विशेष टीमों ने अब तक देश के अलग-अलग राज्यों से इस साजिश में शामिल 13 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जिनसे पूछताछ के आधार पर कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

