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Friday, June 19, 2026

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पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम: ममता बनर्जी के करीबियों ने की CM शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात; सुरक्षा, हॉकर्स और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई पर हुई चर्चा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को एक बेहद अप्रत्याशित और दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले छह वरिष्ठ विधायकों ने राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से विधानसभा परिसर में मुलाकात की। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर जारी भारी राजनीतिक हलचल के बीच हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को राज्य के सियासी गलियारों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस रचनात्मक बैठक में ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था, टीएमसी कार्यकर्ताओं पर कथित पुलिसिया कार्रवाई, हॉकर्स के पुनर्वास और विधानसभा में विपक्ष की विधिक भूमिका जैसे कई ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से सकारात्मक चर्चा हुई।

1. ममता बनर्जी की सुरक्षा पर विधिक रुख: व्यक्तिगत पसंद पर नहीं मिलेगी सरकारी सुरक्षा

बैठक में शामिल टीएमसी विधायकों ने ममता बनर्जी के सुरक्षा दस्ते (Security Detail) में हाल ही में किए गए प्रशासनिक बदलावों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विधायकों का तर्क था कि लंबे समय से ममता बनर्जी के साथ तैनात कुछ भरोसेमंद सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया है।

  • CM शुभेंदु अधिकारी का जवाब: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में कोई विधिक कटौती नहीं की गई है। उन्हें पहले की तरह ही ‘जेड प्लस’ (Z+) सुरक्षा श्रेणी प्राप्त है और स्वीकृत संख्या के अनुसार ही सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
  • मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी सुरक्षा व्यवस्था राज्य की विधिक सुरक्षा एजेंसियों और थ्रेट परसेप्शन (खतरे के आकलन) के आधार पर तय होती है, इसे किसी की व्यक्तिगत पसंद या इच्छा के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता।

2. कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिशोध का मुद्दा

बैठक के दौरान टीएमसी नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं के खिलाफ हो रही कथित पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई:

  • टीएमसी नेता कुणाल घोष ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कई जमीनी कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजनीतिक द्वेष की भावना से प्रेरित होकर झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि किसी ने वास्तव में कानून तोड़ा है, तो विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हो, लेकिन इसे राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
  • इसी क्रम में टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कोलकाता नगर निगम परिषद सदस्य स्वपन समाद्दार की गिरफ्तारी का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया।

3. अतिक्रमण और हॉकर्स के पुनर्वास पर विधिक पक्ष

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियानों (Anti-Encroachment Drives) को लेकर भी विधायकों ने गहरी चिंता जताई। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि हाल ही में ममता बनर्जी स्वयं हॉकर्स के समर्थन में सड़कों पर उतरी थीं।

  • विधायकों की मांग: किसी भी सार्वजनिक भूमि या सड़क से बेदखली अभियान चलाने से पहले प्रभावित हॉकर्स को पर्याप्त समय (Notice Period) दिया जाना चाहिए।
  • पुनर्वास की व्यवस्था: विधिक तौर पर हॉकर्स को हटाने से पहले उनके वैकल्पिक पुनर्वास (Rehabilitation) की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।

4. विधानसभा के सुचारु संचालन और विपक्ष के अधिकारों पर चर्चा

बैठक में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए विधानसभा के भीतर विपक्ष की भूमिका और विधिक सुविधाओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

नेता / विधायकबैठक में उठाया गया मुख्य विधिक व राजनैतिक बिंदु
शोभनदेब चट्टोपाध्याय (वरिष्ठ विधायक)विपक्ष के लिए बैठने की उचित व्यवस्था, कार्यालय आवंटन (Office Allotment) और सदन के पटल पर जनता की आवाज उठाने के लिए पर्याप्त समय व अवसर मिलना चाहिए।
कुणाल घोष (TMC नेता)बैठक को पूरी तरह ‘रचनात्मक और सकारात्मक’ बताया। उन्होंने कहा कि जनहित और सदन के सुचारु संचालन के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संवाद जरूरी है।

विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में ममता के करीबियों और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की यह आमने-सामने की बैठक राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित हो सकती है।

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