कोलकाता/आसनसोल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता परिवर्तन होते ही पूर्व सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें हर बीतते दिन के साथ गंभीर होती जा रही हैं। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष के कारण इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है, वहीं दूसरी तरफ नवनिर्वाचित भाजपा सरकार के प्रशासनिक निर्देश पर पुलिस ने भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों में टीएमसी के कद्दावर पार्षदों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी ने छोड़ा पद, संगठन पर उठाए सवाल
टीएमसी के बेहद वरिष्ठ नेता, पूर्व डिप्टी स्पीकर और रामपुरहाट के पूर्व विधायक आशीष बनर्जी ने मंगलवार (2 जून 2026) को बिरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी। उन्होंने अपने त्यागपत्र की आधिकारिक जानकारी टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेज दी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल पद छोड़ रहे हैं और पार्टी के एक सामान्य सदस्य के रूप में काम करते रहेंगे।
आशीष बनर्जी ने पूर्व विधायक अभिजीत सिन्हा के सुर में सुर मिलाते हुए माना कि हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान जिला कोर कमेटी ने अपनी राजनीतिक व सांगठनिक जिम्मेदारियां सही तरीके से नहीं निभाईं, जिसके कारण पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि साल 2021 में बिरभूम जिले की 11 सीटों में से 10 जीतने वाली टीएमसी इस बार (2026 में) महज 5 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने 6 सीटों पर ऐतिहासिक परचम लहराया।
कोलकाता और आसनसोल में टीएमसी पार्षदों की गिरफ्तारी
सांगठनिक बिखराव के बीच टीएमसी को कानून और व्यवस्था के मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है:
- वसूली केस में सचिन सिंह अरेस्ट: कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 36 से टीएमसी पार्षद सचिन सिंह को पुलिस ने भ्रष्टाचार, जबरन धन उगाही (वसूली) और राजनीतिक विरोधियों को धमकाने व मारपीट करने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान स्थानीय समर्थकों ने हंगामा भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सियालदह अदालत में पेश कर रिमांड पर ले लिया है।
- राहत सामग्री घोटाले में तरुण चक्रवर्ती जेल में: दूसरी बड़ी कार्रवाई आसनसोल नगर निगम (AMC) में हुई, जहां वार्ड 87 के टीएमसी पार्षद तरुण चक्रवर्ती को पुलिस ने रंगेहाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि गरीबों और आपदा पीड़ितों के लिए आई सरकारी राहत सामग्री (राशन पैकेट्स) को उन्होंने अवैध रूप से अपने घर में छिपाकर रखा था। इसके अलावा उन पर क्षेत्र में अवैध बालू खनन, कट मनी (वसूली) और सरकारी आवास योजनाओं के नाम पर गरीबों से पैसे ठगने के भी आरोप हैं।
‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बनाम ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’
राज्य में भाजपा की नई सरकार के गठन के बाद से पिछले एक महीने के भीतर टीएमसी के दर्जनों छोटे-बड़े नेताओं और पार्षदों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का साफ कहना है कि राज्य में अब कानून का राज है और भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, बैकफुट पर आई तृणमूल कांग्रेस इन सभी गिरफ्तारियों को राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) और विपक्ष की आवाज दबाने की सरकारी साजिश करार दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अंदरूनी कलह और कानूनी शिकंजे की यह दोहरी मार टीएमसी के राजनीतिक अस्तित्व के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

