कर्मचारी संगठनों के पत्र के बाद जारी हुआ बयान, भविष्य के अत्याधुनिक मिशनों पर केंद्रित रहेगा अनुसंधान
बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने निजीकरण की तमाम अटकलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि संगठन का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही अंतरिक्ष क्षेत्र में इसकी भूमिका या महत्व को कम किया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी कर आश्वस्त किया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य इसरो को भविष्य की अगली पीढ़ी की तकनीकों और जटिल अंतरिक्ष अभियानों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करना है।
इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश से एक सहयोगात्मक ढांचा तैयार होगा। इसके तहत निजी उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम पहले से विकसित, प्रमाणित और नियमित उपयोग में आने वाली तकनीकों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन कर सकेंगे, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
कर्मचारी संगठनों की चिंताओं के बाद आया स्पष्टीकरण यह आधिकारिक बयान इसरो के कर्मचारियों से जुड़े नौ प्रमुख संगठनों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद सामने आया है। कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को इसरो चेयरमैन वी. नारायणन को एक साझा पत्र लिखा था। पत्र में विनिर्माण और परिचालन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रबंधन से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया था। एजेंसी के इस त्वरित बयान से अब कर्मचारियों और वैज्ञानिकों के बीच उपजी आशंकाओं पर विराम लग गया है।

