नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शुमार दुरंतो एक्सप्रेस में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से एर्नाकुलम के बीच चलने वाली ‘ट्रेन संख्या 12223 दुरंतो एक्सप्रेस’ में हुई इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कड़ा रुख अपनाया है। FSSAI ने इस मामले में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) को एक वैधानिक (Statutory) नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
टॉयलेट के अंदर साफ हो रहे थे बर्तन; वीडियो हुआ वायरल
खाद्य नियामक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर की गई है। इस वीडियो में ट्रेन के ऑनबोर्ड कैटरिंग स्टाफ या वेंडर के कर्मचारी कथित रूप से पैसेंजर टॉयलेट (शौचालय) क्षेत्र के अंदर ले जाकर खाने-पीने के बर्तनों की सफाई करते हुए रंगे हाथों देखे गए। प्राधिकरण ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और यात्रियों की सेहत के साथ एक गंभीर और आपराधिक खिलवाड़ मानते हुए तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
FSSAI की IRCTC को दो टूक: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
एफएसएसएआई ने अपने नोटिस में आईआरसीटीसी से इस पूरे शर्मनाक मामले पर तत्काल विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (की गई कार्रवाई की रिपोर्ट) मांगी है। प्राधिकरण ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश के लाखों रेल यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और शुद्धता से किसी भी स्तर पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। टॉयलेट परिसर जैसी अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में बर्तनों को धोना भोजन को पूरी तरह दूषित करता है और ऐसी घोर लापरवाही को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन
नियामक संस्था ने अपने आधिकारिक नोटिस में रेखांकित किया है कि यह शर्मनाक घटना खाद्य व्यवसायों के लिए निर्धारित बुनियादी स्वच्छता और सैनिटरी मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। ट्रेन के टॉयलेट परिसर में खाद्य बर्तनों की सफाई करना ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और रजिस्ट्रीकरण) विनियम, 2011’ के शेड्यूल-4 (Schedule-4) में निर्धारित अनिवार्य वैधानिक नियमों के पूरी तरह विपरीत है। FSSAI ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर चिंता बताते हुए जिम्मेदार रेल कर्मचारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

