10 वर्षों में सक्रिय संगठनों की संख्या में 14,556 की गिरावट, विदेशी अंशदान में हुआ इजाफा
नई दिल्ली: विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत पंजीकृत सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के दायरे में बीते एक दशक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एफसीआरए संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली औपचारिक बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में सक्रिय एफसीआरए पंजीकृत संगठनों की कुल संख्या पिछले 10 वर्षों में घटकर लगभग आधी रह गई है। हालांकि, सक्रिय संगठनों की संख्या में आई इस भारी कमी के विपरीत विदेशों से प्राप्त होने वाले कुल अंशदान की धनराशि में इसी अवधि के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
10 वर्षों में 14,556 सक्रिय एनजीओ कम हुए गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समिति के समक्ष पेश किए गए तुलनात्मक विवरण के मुताबिक, वर्ष 2015 में देश भर में एफसीआरए के अंतर्गत पंजीकृत सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों की संख्या 29,022 थी। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 के अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश के 15 प्रमुख राज्यों में अब मात्र 14,466 सक्रिय एनजीओ ही पंजीकृत रह गए हैं। इस प्रकार बीते एक दशक की समयावधि में सक्रिय पंजीकृत एनजीओ की कुल संख्या में 14,556 की शुद्ध कमी आई है।
सख्त नियमों और निगरानी के चलते हुआ बदलाव संसदीय समिति की बैठक में साझा की गई जानकारी के अनुसार, विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए कड़े नियमों, समय पर वार्षिक रिटर्न दाखिल न करने, विदेशी अंशदान के कथित दुरुपयोग और वैधानिक दिशानिर्देशों का पालन न करने के कारण बड़ी संख्या में संगठनों के पंजीकरण रद्द अथवा गैर-सक्रिय किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों के कड़े होने के बावजूद जो संगठन पूरी पारदर्शिता और कानूनी मानकों के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें प्राप्त होने वाले विदेशी अनुदान के प्रवाह में मजबूती बनी हुई है। समिति इस संशोधन विधेयक के विभिन्न कानूनी प्रावधानों और नियमों पर आगे भी विस्तृत विचार-विमर्श जारी रखेगी।

