2,700 से अधिक चालकों को आरटीओ नोटिस के बाद बढ़ी चिंता, संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री से की राहत की मांग
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा व्यावसायिक ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बीच सत्तारूढ़ शिवसेना के कई विधायकों ने सरकार से नरम और उदार रुख अपनाने की अपील की है। विधायकों का कहना है कि भाषा सीखने की प्रक्रिया के कारण चालकों की रोजी-रोटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए और उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात कर चालकों को दी जाने वाली समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को डराने या कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय चालकों को मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
2,700 से अधिक चालकों को जारी हुए नोटिस परिवहन विभाग की ओर से शुरू किए गए विशेष जांच अभियान के तहत 20 अगस्त को 1,268 और 21 अगस्त को 1,499 गैर-मराठी भाषी चालकों को नोटिस थमाए गए। इसके बाद से चालकों में परमिट और लाइसेंस रद्द होने को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की भाषा, पहचान और संस्कृति को सुरक्षित रखना है।
1.65 लाख चालकों को मिला प्रशिक्षण, विधायकों ने शुरू कीं कक्षाएं सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 105 दिनों के विशेष अभियान के तहत अब तक करीब 1.65 लाख से अधिक चालकों को मराठी भाषा का बुनियादी प्रशिक्षण देकर प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। जमीनी स्तर पर चालकों की मदद के लिए कुर्ला विधायक मंगेश कुडालकर, चांदीवली विधायक दिलीप लांडे और अंधेरी ईस्ट विधायक मुर्जी पटेल ने अपने-अपने क्षेत्रों में मुफ्त भाषा कक्षाओं का आयोजन शुरू कराया है। विधायकों के अनुसार, परिवहन मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया है कि नियमों के पालन के साथ चालकों को भाषा सीखने का अतिरिक्त अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

