स्वतंत्रता दिवस पर जारी पत्र में जताया खेद; कहा—’पछतावा जताना प्रतिष्ठा या अहंकार का सवाल नहीं’
नई दिल्ली:
एनएएलएसएआर (NALSAR) हैदराबाद और एनएलएसआईयू (NLSIU) बंगलूरू के छात्रों के कड़े विरोध के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कानून के छात्रों से आधिकारिक रूप से माफी मांग ली है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जारी तीन पन्नों के पत्र में मिश्रा ने कहा कि यदि उनके किसी बयान, शब्द या पूर्व में जारी चिट्ठी से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए बिना किसी झिझक के खेद प्रकट करते हैं और माफी मांगते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों की चिंताओं को समझना और खेद जताना किसी प्रतिष्ठा या अहंकार का विषय नहीं है, बल्कि यह छात्रों की भावनाओं का सम्मान करने का प्रतीक है।
क्या था NALSAR और BCI के बीच पूरा विवाद?
यह विवाद हैदराबाद स्थित ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ के दीक्षांत समारोह के दौरान शुरू हुआ था:
- छात्रों का विरोध: नालसार के कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की भागीदारी को लेकर आपत्ति जताई थी।
- बीसीआई की सख्त कार्रवाई: इसके जवाब में बीसीआई अध्यक्ष ने नालसार के 2026 बैच के पूरे बैच का राज्य बार काउंसिलों में नामांकन (Enrollment) रोकने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया था।
- कड़े शब्दों का इस्तेमाल: मिश्रा ने पूर्व में छात्रों के इस विरोध को ‘घटिया राजनीति’ करार दिया था, जिसके बाद एनएलएसआईयू बंगलूरू और नालसार के छात्रों व पूर्व छात्रों ने बीसीआई की शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बिना शर्त माफी की मांग की थी।
- फैसले की वापसी: व्यापक विरोध और आलोचना के बाद बीसीआई को नामांकन रोकने का आदेश वापस लेना पड़ा था।
बीसीआई अध्यक्ष के पत्र के प्रमुख बिंदु
| पहलू | पत्र में कही गई मुख्य बातें |
| दीक्षांत समारोह में उपस्थिति | दीक्षांत समारोह छात्रों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। समारोह में भाग लेने या न लेने का निर्णय पूरी तरह छात्रों की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए; किसी को इसके लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। |
| आपसी संवाद और सम्मान | बार, न्यायपालिका और कानून छात्रों का संबंध किसी भी अस्थायी विवाद से बड़ा है। सभी मतभेदों का हल बातचीत और आपसी सम्मान से निकलना चाहिए। |
| छात्रों की गरिमा | बीसीआई कानून के विद्यार्थियों को न्याय व्यवस्था का भविष्य मानता है और उनकी स्वतंत्र सोच व जायज चिंताओं का सम्मान करता है। |

