नई दिल्ली: देश के प्रख्यात संवैधानिक विशेषज्ञ, प्रिसिद्ध राजनीतिक वैज्ञानिक और पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश की तमाम राजनीतिक व सामाजिक शख्सियतों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए डॉ. कश्यप के अवसान को एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा- अग्रणी संवैधानिक विद्वान खो दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए डॉ. सुभाष कश्यप को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने लिखा, “डॉ. कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनका उत्कृष्ट लेखन हमेशा याद किया जाएगा।” प्रधानमंत्री ने डॉ. कश्यप के शोक संतप्त परिवार और उनके मित्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
‘आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा उनका लेखन’: राजनाथ सिंह
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डॉ. कश्यप के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक अप्रतिम विद्वान और विपुल लेखक बताया। रक्षा मंत्री ने कहा, “डॉ. कश्यप ने भारतीय संविधान, संसदीय लोकतंत्र, शासन व्यवस्था और देश के संवैधानिक इतिहास पर अनेक कालजयी पुस्तकें लिखीं। उनके विचारों ने हमेशा जनचर्चा को समृद्ध किया और आमजन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को गहरा किया।” राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि डॉ. कश्यप का साहित्य और लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा सीख और प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बना रहेगा।
7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के रहे महासचिव
10 मई 1929 को जन्मे डॉ. सुभाष सी. कश्यप का भारतीय संसद और संविधान के इतिहास से बेहद गहरा नाता रहा। उन्होंने साल 1984 से 1990 तक देश की सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव (Secretary-General of Lok Sabha) के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने संसदीय प्रक्रियाओं को सुचारू और पारदर्शी बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। भारतीय संविधान और संवैधानिक कानून पर उनकी लिखी गईं गाइड बुक्स आज भी कानून के छात्रों और नीति-निर्माताओं के लिए प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती हैं।
‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ कमेटी में निभाई अहम भूमिका
डॉ. सुभाष कश्यप अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय रहे। वे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में केंद्र सरकार द्वारा गठित उस हाई-लेवल कमेटी (उच्चस्तरीय समिति) के मुख्य सदस्य थे, जिसे देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ (One Nation, One Election) यानी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचे की व्यवहार्यता जांचने व रिपोर्ट तैयार करने की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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