अमित शाह की अनुपस्थिति पर भड़का विपक्ष; पेपर लीक पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 10 करोड़ तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान
नई दिल्ली:
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर दिनभर चली चर्चा के बाद राजनीतिक गतिरोध उस समय चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यह वॉकआउट तब हुआ जब कार्मिक एवं लोक शिकायत राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार की ओर से विधेयक पर अपना जवाब देने के लिए खड़े हुए।
विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्हें सदन में बुलाने की मांग की थी, जिसे सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने खारिज कर दिया।
अमित शाह को बुलाने की मांग पर हंगामा
सदन में चर्चा समाप्त होने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि बहस के दौरान लाठीचार्ज और गोलीबारी जैसे गंभीर मुद्दे उठे हैं, इसलिए गृह मंत्री की मौजूदगी अनिवार्य थी। हालांकि, सभापति द्वारा कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिए जाने पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी सांसद सदन से बाहर चले गए।
विपक्ष के इस रुख पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने तीखा हमला बोला:
- नड्डा का आरोप: जेपी नड्डा ने कहा कि आठ घंटे की लंबी चर्चा के बाद मंत्री का जवाब सुने बिना वॉकआउट करना विपक्ष के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
- संसदीय मर्यादा का उल्लंघन: उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और उसे लोकतांत्रिक व संसदीय प्रक्रियाओं का कोई सम्मान नहीं है।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक के कड़े प्रावधान
विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को रोकने के लिए कई ऐतिहासिक व दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं:
- सख्त सजा और भारी जुर्माना:
- अनुचित साधनों में लिप्त पाए जाने पर सजा को 3 से बढ़ा कर 5 से 10 साल कर दिया गया है। जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख तक कर दिया गया है।
- संगठित अपराध (पेपर लीक माफिया): संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 7 से 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने के साथ संपत्तियों की जब्ती का प्रावधान है।
- सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर नकेल:
- धांधली में दोषी पाई जाने वाली परीक्षा संचालक कंपनियों पर ₹5 करोड़ का जुर्माना लगेगा और उन्हें 8 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) कर दिया जाएगा।
- कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है।
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच:
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में दिन-प्रतिदिन (Day-to-Day) सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित होंगे।
- जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा और चार्जशीट के 3 महीने के अंदर ट्रायल समाप्त किया जाएगा।
- केंद्र सरकार को जांच के लिए ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ (STF) के गठन का अधिकार होगा।
- निर्दोष छात्रों को पूरी राहत:
- विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा देने वाले आम और नियमित अभ्यर्थियों को इन दंडात्मक धाराओं के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि किसी भी निष्पक्ष परीक्षार्थी को बेवजह कानूनी प्रताड़ना न झेलनी पड़े।

