बच्चे की कस्टडी विवाद के मामलों पर लागू होंगे निर्देश, अदालत ने कहा- कानून को कमजोर करना मकसद नहीं
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और बच्चों की कस्टडी से जुड़े कानूनी मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) कानून के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय तय किए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की दो सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि ये विशेष सुरक्षा उपाय मुख्य रूप से उन संवेदनशील मामलों में प्रभावी होंगे, जहां माता-पिता के बीच गंभीर वैवाहिक विवाद चल रहा हो और साथ रह रहे माता-पिता या उनके परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत यौन उत्पीड़न का आरोप मढ़ दिया गया हो।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया कि इन सुरक्षात्मक उपायों को तय करने का उद्देश्य किसी भी सूरत में पॉक्सो कानून को कमजोर या निष्प्रभावी बनाना नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि यह कानून बच्चों को किसी भी तरह के यौन हमले, उत्पीड़न और यौन शोषण से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया एक अत्यंत कड़ा और जरूरी विधान है। हालांकि, कस्टडी विवादों में एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए इसका हथियार के रूप में गलत इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील पारिवारिक विवादों में एक ओर बच्चे की वास्तविक सुरक्षा और दूसरी ओर झूठे आरोपों के चलते आरोपी व्यक्ति को होने वाले अपूरणीय मानसिक व सामाजिक नुकसान, दोनों के बीच एक स्पष्ट संतुलन कायम करना बेहद जरूरी है। अदालत के अनुसार, बिना प्रारंभिक जांच और ठोस साक्ष्यों के आंख मूंदकर की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई से पारिवारिक विवादों में न्याय की मूल भावना प्रभावित होती है, जिसे रोकने के लिए अदालतों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

