एमके स्टालिन के मीसा हिरासत रिकॉर्ड वाले बयान से भड़का था विवाद, पार्टी नेताओं ने जताई थी कड़ी आपत्ति
चेन्नई: द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के उप महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा द्वारा कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार के खिलाफ की गई तीखी व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पार्टी के भीतर और बाहर नेताओं द्वारा इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराने के बाद ए. राजा ने सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनके बयानों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें अपने शब्द वापस लेने में किसी प्रकार का संकोच या हिचक नहीं है।
स्टालिन की मीसा हिरासत पर बयान से शुरू हुआ विवाद इस पूरे राजनीतिक विवाद का सूत्रपात सात सितंबर को कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार के एक बयान से हुआ था। कुमार ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि ऐसा कोई आधिकारिक और पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि डीएमके प्रमुख एवं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान कड़े आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत जेल भेजा गया था।
डीएमके का राज्यव्यापी प्रदर्शन और जुबानी जंग कानून मंत्री के इस दावे के बाद डीएमके नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। पार्टी ने स्टालिन के आपातकाल के संघर्षों पर सवाल उठाने का कड़ा विरोध करते हुए शनिवार को राज्यव्यापी स्तर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच ए. राजा ने कानून मंत्री पर तीखा व्यक्तिगत हमला बोला था, जिस पर विवाद बढ़ने के बाद अब उन्होंने खुद खेद प्रकट करते हुए मामले को शांत करने का प्रयास किया है।

