21 सांसदों ने लिया हिस्सा; 543 पर सीटें स्थिर रखने और तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व न घटाने की मांग पर बनी सहमति
चेन्नई:
प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ राज्य की रणनीति तैयार करने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को राज्य के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की अहम बैठक बुलाई। चेन्नई के कलैवानर अरंगम में हुई इस सर्वदलीय बैठक में 21 सांसदों ने हिस्सा लिया, हालांकि राज्य की दो प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों—सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) और मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी।
बैठक में शामिल विपक्षी व सहयोगी दलों के सांसदों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखा कि संसद में तमिलनाडु का मौजूदा प्रतिनिधित्व किसी भी सूरत में कम नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस और अन्य दलों का रुख
बैठक में कांग्रेस, वीसीके, भाकपा, माकपा, एमडीएमके और आईयूएमएल के सांसद शामिल हुए:
- कार्ति चिदंबरम (कांग्रेस सांसद): उन्होंने कहा कि यह दलगत राजनीति से ऊपर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा है। उन्होंने मांग की कि “लोकसभा की कुल सीटें 543 पर ही स्थिर रहनी चाहिए और तमिलनाडु का 39 लोकसभा सीटों का हिस्सा बरकरार रहना चाहिए। जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन स्वीकार नहीं होगा।”
- प्रवीण चक्रवर्ती (कांग्रेस सांसद): उन्होंने डीएमके और अन्नाद्रमुक के बहिष्कार पर निराशा जताते हुए कहा कि लंबे समय तक राज्य में शासन करने वाले दलों का राज्य के अधिकारों की इस बैठक से दूर रहना दुखद है।
DMK ने क्यों किया बैठक का बहिष्कार?
| दल / नेता | बहिष्कार और रुख पर स्पष्टीकरण |
| टी. के. एस. एलंगोवन (DMK प्रवक्ता) | टीवीके (TVK) सरकार ने परिसीमन पर अपना रुख और बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं किया था। बिना विचार जाने बैठक में शामिल होना संभव नहीं था। |
| अन्य अनुपस्थित दल | अन्नाद्रमुक (AIADMK), पीएमके (PMK) और डीएमडीके (DMDK) ने भी बैठक में भाग नहीं लिया। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 36 सांसद अनुपस्थित रहे। |
दक्षिण भारत के राज्यों को सता रहा यह बड़ा डर
- जनसांख्यिकीय नुकसान (Demographic Penalty): तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों ने दशकों तक राष्ट्रीय परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया।
- उत्तरी राज्यों की अधिक बढ़त: उत्तरी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक होने के कारण, यदि 2026 के बाद केवल जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन हुआ तो दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें घटेंगी और संसद में उनका संघीय प्रभाव कम हो जाएगा।
- 543 सीटों पर स्थिरता की मांग: तमिलनाडु के राजनीतिक दलों की मुख्य मांग है कि 1971 की जनगणना के आधार पर तय मौजूदा 543 सीटों की सीमा और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात ही आगे भी जारी रखा जाए।

