मुख्य सचिव के आदेश पर शुरू हुआ घमासान; विजयन ने बताया ‘RSS एजेंडा’, बंसल बोले—’अपमान करने पर होगी 3 साल की जेल’
तिरुवनंतपुरम:
स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन को लेकर केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के रुख पर तीखा हमला बोला है। वीएचपी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत का विरोध विजयन की ‘अत्यधिक राजनीतिक मानसिकता’ और पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करता है।
विवाद की शुरुआत: मुख्य सचिव का आदेश
इस पूरे विवाद की शुरुआत केरल सरकार के मुख्य सचिव द्वारा जारी एक आदेश के बाद हुई:
- आदेश का विवरण: स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरे ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया था।
- विजयन का विरोध: विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरएसएस के एजेंडे के आगे आत्मसमर्पण कर रही है और केवल शुरुआती दो पंक्तियों का ही गायन होना चाहिए।
धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक तर्क बनाम VHP का पलटवार
| पक्ष / नेता | तर्क एवं मुख्य बातें |
|---|---|
| पिनाराई विजयन (माकपा नेता) | पूरे वंदे मातरम का गायन देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। संविधान सभा ने भी केवल शुरुआती दो पदों को स्वीकार किया था। |
| विनोद बंसल (VHP राष्ट्रीय प्रवक्ता) | वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम का महान प्रतीक है। इसे आरएसएस का एजेंडा कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। समस्या राष्ट्रीय गीत में नहीं, विरोधी की विचारधारा में है। |
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्पष्ट किया कि संसद द्वारा पारित कानूनों के तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान वैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय गीत का अनादर करने वालों और नियम का उल्लंघन करने वालों को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

