युवाओं को भड़काने और आतंकी भर्ती के दोषी; कोर्ट ने लगाया जुर्माना, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
नई दिल्ली: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की नई दिल्ली स्थित राउज़ एवेन्यू ज़िला कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संचालित स्पेशल कोर्ट-01 ने प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया’ (आईएसआईएस) के चार सक्रिय सदस्यों को बहुचर्चित ‘वॉइस ऑफ हिंद’ आतंकी साजिश मामले में कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले के मुख्य दोषियों उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी (A-1), रमीज अहमद लोन (A-2) और तनवीर अहमद भट (A-3) में से प्रत्येक को 6-6 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, मामले के चौथे दोषी अफशान परवेज जराबी (A-5) को 5 साल की कठोर कैद की सजा दी गई है।
सजा के अतिरिक्त विशेष अदालत ने चारों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत के आदेशानुसार, उमर निसार पर ₹36,000, रमीज अहमद लोन पर ₹31,000, तनवीर अहमद भट पर ₹23,000 तथा अफशान परवेज जराबी पर ₹9,000 का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि दोषियों को सुनाई गई सभी वैधानिक सजाएं एक साथ (कॉनकरेंटली) चलेंगी।
उल्लेखनीय है कि विशेष एनआईए अदालत ने इन चारों आरोपियों को विगत 17 सितंबर को ही विभिन्न धाराओं के तहत औपचारिक रूप से दोषी करार दिया था। न्यायिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि ये सभी आरोपी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूए (पी) एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक साजिश रचने के गंभीर अपराधों में सीधे तौर पर संलिप्त थे।
जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत पुख्ता साक्ष्यों के अनुसार, ये दोषी प्रतिबंधित संगठन आईएसआईएस के ऑनलाइन प्रचार-प्रसार मॉड्यूल ‘वॉइस ऑफ हिंद’ पत्रिका के जरिए भड़काऊ सामग्री फैलाने, सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, उनकी आतंकी गतिविधियों में नई भर्ती करने और संगठन के हिंसक एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे। अदालत ने इन कृत्यों को देश की संप्रभुता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।

