बीडीए भूखंड आवंटन में कथित अनियमितताओं का आरोप, 6 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
बंगलूरू: कर्नाटक में जनप्रतिनिधियों (सांसद-विधायकों) से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके परिजनों से संबंधित ‘सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट’ के खिलाफ दायर शिकायत पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में लोकायुक्त पुलिस को औपचारिक निर्देश जारी करते हुए विस्तृत रिपोर्ट और अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह विवाद बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए) के भूखंड आवंटन में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़ा हुआ है।
लोकायुक्त पुलिस को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश, अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को अपर नगर दीवानी एवं सत्र अदालत ने ‘लंचमुक्त कर्नाटक वेदिके’ के अध्यक्ष विजयराघव मराठे द्वारा दायर निजी शिकायत की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ने अपने पूर्व हलफनामे में रही तकनीकी खामी को अब पूरी तरह दुरुस्त कर लिया है, जिसके चलते इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही बढ़ाने में कोई वैधानिक अड़चन शेष नहीं है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की है।
ट्रस्ट से जुड़े हैं कांग्रेस अध्यक्ष और उनके मंत्री पुत्र शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीडीए के तहत आने वाले भूखंड के आवंटन में नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया। उल्लेखनीय है कि इस ट्रस्ट में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, उनके पुत्र एवं कर्नाटक सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी व ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खरगे सहित परिवार के अन्य सदस्य प्रमुख ट्रस्टी के रूप में शामिल हैं। इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को प्रक्रियात्मक त्रुटियों के आधार पर बीएनएसएस की धारा 223 के तहत दिए गए जांच निर्देश को रद्द करते हुए, हलफनामे की कमी को ठीक कर धारा 175 के तहत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।

