मास्को/बीजिंग: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी चीन यात्रा को लेकर रूस ने नया विवरण साझा किया है। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन की यह ‘स्टेट विज़िट’ (राजकीय यात्रा) दोनों देशों के बीच हुई ऐतिहासिक ‘अच्छे पड़ोसी और दोस्ताना सहयोग संधि’ पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ के विशेष अवसर पर हो रही है।
यह महत्वपूर्ण संधि साल 2001 में मास्को में पुतिन और चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति जियांग ज़ेमिन के बीच हस्ताक्षरित की गई थी, जिसने आधुनिक रूस-चीन संबंधों की नींव रखी।
पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकातों का इतिहास
- पिछली मुलाकात: दोनों नेताओं की अंतिम मुलाकात पिछले साल सितंबर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद वे 3 सितंबर को जापान के खिलाफ प्रतिरोध युद्ध में जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बीजिंग में आयोजित भव्य सैन्य परेड में शामिल हुए थे। उस परेड में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन भी मौजूद थे।
- शी जिनपिंग का रूस दौरा: पिछले साल मई में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पुतिन के निमंत्रण पर मास्को की चार दिवसीय राजकीय यात्रा की थी और सोवियत संघ की ‘महान देशभक्ति युद्ध’ में जीत की 80वीं वर्षगांठ समारोह का हिस्सा बने थे। राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग का वह 11वां रूस दौरा था।
- गहरी दोस्ती की बानगी: रॉयटर्स के अनुसार, पुतिन और शी जिनपिंग पिछले कुछ वर्षों में 40 से ज्यादा बार मिल चुके हैं। शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को परिभाषित करते हुए कहा था, “चीन और रूस ऐसे अच्छे पड़ोसी हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता, ऐसे सच्चे दोस्त हैं जो सुख-दुख साझा करते हैं।”
‘असीमित साझेदारी’ और आर्थिक निर्भरता
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद दोनों देशों ने ‘असीमित’ (No-Limits) रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए और उसे अलग-थलग करने की कोशिश की, तब चीन ने न तो रूस की सार्वजनिक आलोचना की और न ही इन प्रतिबंधों का समर्थन किया। इसके विपरीत, दोनों देशों ने राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूत किया है, जिसके चलते रूस की आर्थिक निर्भरता चीन पर लगातार बढ़ रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम: पावर ऑफ साइबेरिया 2
आर्थिक सहयोग को नया विस्तार देते हुए पिछले साल सितंबर में दोनों देशों ने मंगोलिया के रास्ते बनने वाली ‘पावर ऑफ साइबेरिया 2’ (Power of Siberia 2) प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही दो अन्य मार्गों से भी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति बनी थी, जो रूस के ऊर्जा बाजार को यूरोप से एशिया की तरफ मोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
वर्ष 2026 में दो बार चीन जाएंगे पुतिन
रूसी सरकारी मीडिया ‘आरटी’ (RT) के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने संकेत दिए हैं कि पुतिन के साल 2026 में दो बार चीन जाने की उम्मीद है। पहली उनकी मौजूदा राजकीय यात्रा है, जबकि दूसरी यात्रा नवंबर में तय है, जब वे शेनझेन में आयोजित होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने बीजिंग पहुंचेंगे।

