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Friday, June 19, 2026

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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत: 7 में से 5 सीटों पर कब्ज़ा; BJP-JD(S) गठबंधन का गणित फेल, उच्च सदन में कांग्रेस का बढ़ा दबदबा

बेंगलुरु: झारखंड के राज्यसभा चुनाव में लगे झटके के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए कर्नाटक से एक बहुत बड़ी और राहत भरी राजनीतिक खबर सामने आई है। कर्नाटक विधान परिषद (Legislative Council) की सात रिक्त सीटों के लिए हुए बेहद दिलचस्प द्विवार्षिक चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। गुरुवार (18 जून 2026) को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में हुई मतगणना के बाद घोषित परिणामों में कांग्रेस स्पष्ट रूप से सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी है।

दूसरी ओर, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) केवल 2 सीटें जीतने में सफल रही, जबकि जनता दल (सेक्युलर) यानी JD(S) अपनी एकमात्र सीट भी बचाने में बुरी तरह नाकाम रही और उसके उम्मीदवार को करारी हार का सामना करना पड़ा।

विजेता और पराजित उम्मीदवारों की सूची

इस चुनाव में सात सीटों के लिए कुल आठ उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे सातवीं सीट के लिए मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा हो गया था:

  • कांग्रेस के 5 विजयी उम्मीदवार: बी.के. हरिप्रसाद, थिप्पन्नाप्पा कामाकानूर, पी.वी. मोहन, शिवन्ना बी.एस. (मालवल्ली) और विनय कार्तिक प्रकाश।
  • BJP के 2 विजयी उम्मीदवार: लिंगराज पाटिल और रघु आर.।
  • JD(S) के पराजित उम्मीदवार: गोविंदराजू (इन्हें सातवीं और सबसे हाई-प्रोफाइल सीट के मुकाबले में शिकस्त झेलनी पड़ी)।

उच्च सदन (75 सदस्यीय) में अब दलीय स्थिति
इन अप्रत्याशित नतीजों के बाद कर्नाटक विधान परिषद की 75 सदस्यीय संख्या में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के करीब पहुंच गई है:

  • कांग्रेस: 34 से बढ़कर 39 सदस्य (सबसे बड़ी पार्टी और मजबूत स्थिति)।
  • BJP: 29 सदस्य
  • JD(S): 7 से घटकर महज 6 सदस्य
  • निर्दलीय: 01 सदस्य।

22 वोट पास थे, फिर भी जीती 5वीं सीट; समझिए पूरा विधिक व राजनैतिक गणित

यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के तहत कराया गया था।

  1. जीत का कोटा: विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को परिषद पहुंचने के लिए न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता थी।
  2. कांग्रेस का संख्या बल: 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं। इस आधार पर कांग्रेस ने अपने पहले चार उम्मीदवारों को 28-28 वोट आसानी से दिलाकर (कुल 112 वोट) सीधे निर्वाचित करा लिया।
  3. रणनीतिक खेल: चार उम्मीदवारों की जीत के बाद कांग्रेस के पास केवल 22 अतिरिक्त वोट शेष बचे थे। पांचवें उम्मीदवार की जीत के लिए पार्टी को 6 और वोटों की दरकार थी। कांग्रेस ने अपने कुशल संगठनात्मक प्रबंधन, निर्दलीय विधायकों और अन्य छोटे दलों के विधायकों का समर्थन जुटाकर आवश्यक कोटा पूरा किया और सातवीं सीट झटककर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया।

“अंतरात्मा की आवाज़” का दांव पड़ा उल्टा, ढेर हुआ BJP-JD(S) गठबंधन

विधानसभा में 62 विधायकों वाली बीजेपी और 18 विधायकों वाली जेडीएस ने मिलकर गोविंदराजू को मैदान में उतारा था। गठबंधन को पूरी उम्मीद थी कि वे निर्दलीय विधायकों, कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष के विधायकों के बल पर अपनी लाज बचा लेंगे।

जेडीएस नेतृत्व को यह भी भरोसा था कि कांग्रेस खेमे से कुछ विधायक अपनी “अंतरात्मा की आवाज़” पर क्रॉस-वोटिंग करेंगे। लेकिन सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार की विधिक घेरेबंदी के आगे विपक्ष की रणनीति पूरी तरह फेल हो गई और कोई क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई।

100% मतदान ने बढ़ाई दिलचस्पी; 30 जून को खाली हो रही थीं सीटें

गुरुवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चले मतदान में 100 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई, जहां सभी 222 पात्र विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

यह चुनाव उन 7 सीटों को भरने के लिए कराया गया था जो आगामी 30 जून को वर्तमान सदस्यों के सेवानिवृत्त (Retire) होने से खाली हो रही हैं। रिटायर होने वाले सदस्यों में कांग्रेस के गोविंदराजू, नसीर अहमद, थिप्पन्नाप्पा, बी.के. हरिप्रसाद और बीजेपी के एमटीबी नागराजू, प्रताप सिम्हा नायक व सुनील वल्यापुर शामिल हैं। चुनाव से पहले इस कोटे में कांग्रेस के पास 4 सीटें थीं, जिसे बढ़ाकर अब उसने 5 कर लिया है।

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