कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पुलिस थानों पर हमले, सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ और हिंसक भीड़ के उपद्रव पर विधिक रूप से पूरी तरह लगाम कसने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य की सुवेंदु सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में दो अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़े विधेयक (Bills) पेश करने जा रही है। इन प्रस्तावित कानूनों का मुख्य विधिक मकसद राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) बनाए रखना और कानून हाथ में लेने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ा प्रशासनिक शिकंजा कसना है।
राज्य सचिवालय (नवान्न) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गृह विभाग सोमवार को इन दोनों विधेयकों को कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश कर सकता है, जिसके बाद इन्हें इसी बजट सत्र में पटल पर रखा जाएगा।
1. 54 साल पुराने सार्वजनिक व्यवस्था कानून (1972) में बड़ा विधिक संशोधन
सरकार का पहला कदम ‘पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के कानून, 1972’ (West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972) को पूरी तरह से अपग्रेड करना है।
- बदलेगा दायरा: यह 54 साल पुराना कानून अब तक दंगे, आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक शांति भंग करने वाली घटनाओं से निपटने का विधिक आधार रहा है।
- पुलिस को अतिरिक्त अधिकार: बदलते दौर और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सरकार इसके विधिक दायरे को व्यापक बनाने जा रही है, जिससे पुलिस और जिला प्रशासन को हिंसक घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई (Swift Action) करने के अतिरिक्त विधिक अधिकार प्राप्त होंगे।
2. नया कानून: ‘पब्लिक सेफ्टी कंट्रोल एंड एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल’
सरकार का दूसरा और सबसे प्रभावी प्रस्ताव नया पब्लिक सेफ्टी बिल है। मौजूदा कानून जहां केवल सामान्य कानून-व्यवस्था तक सीमित हैं, वहीं यह नया बिल सार्वजनिक सुरक्षा को विधिक केंद्र में रखेगा। इसका सीधा निशाना वे असामाजिक तत्व और संगठित उपद्रवी होंगे जो भीड़ की आड़ में पुलिस स्टेशनों और सरकारी भवनों पर हमले करते हैं।
फाल्टा थाना कांड बना इस विधिक बदलाव का टर्निंग पॉइंट
राज्य में इस सख्त कानून को लाने की प्रक्रिया में हाल ही में दक्षिण 24 परगना के फाल्टा (Falta) में हुई हिंसक घटना ने टर्निंग पॉइंट का काम किया। वहां गिरफ्तार टीएमसी नेता जहांगीर खान को विधिक हिरासत से छुड़ाने के लिए उनकी पत्नी के नेतृत्व में उग्र भीड़ ने पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश की थी। इस घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ संकेत दिए थे कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए एक अभेद्य कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
नुकसान किया तो संपत्ति कुर्क कर वसूला जाएगा मुआवजा
प्रस्तावित कानूनी मसौदे का सबसे सख्त और वित्तीय पहलू यह है कि इसमें ‘नुकसान की वसूली’ (Recovery of Damages) का कड़ा विधिक प्रावधान शामिल किया जा रहा है:
- व्यक्तिगत जवाबदेही: यदि कोई भी व्यक्ति या भीड़ का हिस्सा सार्वजनिक (सरकारी बसें, ट्रेनें, कार्यालय) या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया जाता है, तो नुकसान का विधिक आकलन कर उसकी भरपाई सीधे दोषी से की जाएगी।
- संपत्ति की नीलामी: वित्तीय हर्जाना न चुकाने की स्थिति में प्रशासन को दोषी की अचल व चल संपत्ति को विधिक रूप से कुर्क (Attach) करने और उसे बेचकर (Auction) मुआवजा वसूलने का पूरा विधिक अधिकार होगा।
तीन राज्यों के कानूनी मॉडल का गहन अध्ययन
पश्चिम बंगाल के गृह विभाग ने इस नए कानूनी ढांचे का मसौदा तैयार करते समय देश के तीन मुख्य राज्यों के कड़े कानूनों के विधिक प्रावधानों का तुलनात्मक अध्ययन किया है, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| राज्य का मॉडल | कानून की मुख्य विधिक दिशा | बंगाल सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले संभावित प्रावधान |
| उत्तर प्रदेश (UP Model) | संगठित अपराध, भू-माफिया और अवैध संपत्तियों के ध्वस्तीकरण व जब्ती पर केंद्रित। | उपद्रवियों और दंगाइयों की संपत्तियों से सार्वजनिक नुकसान की विधिक वसूली का क्लॉज। |
| महाराष्ट्र (MCOCA Model) | चरमपंथी, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और अंडरवर्ल्ड के संगठित सिंडिकेट पर कड़ा प्रहार। | थानों और रणनीतिक सरकारी दफ्तरों पर हमले को गैर-जमानती और कड़े विधिक दायरे में लाना। |
| गुजरात (GUJCTOC Model) | आतंकवादी नेटवर्क और संगठित अंतर-राज्यीय आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना। | असामाजिक तत्वों की निगरानी और त्वरित विधिक ट्रायल (Fast Track Trial) की व्यवस्था। |
सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन दोनों कानूनों के प्रभावी होने के बाद राज्य में राजनीतिक या सामाजिक आड़ में हिंसा फैलाने वाले तत्व ‘कानून हाथ में लेने से पहले पांच बार सोचेंगे।’ अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में पेश होने वाले अंतिम बिल का विधिक स्वरूप कितना कड़ा होता है।

