बीड/मुंबई: महाराष्ट्र के बीड जिले से ताल्लुक रखने वाले एक 24 वर्षीय युवक ने म्यांमार (Myanmar) से अपनी विधिक कैद के दौरान परिजनों को गुप्त रूप से संपर्क कर वहां चल रहे एक बेहद खौफनाक और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी (Human Trafficking) व साइबर गुलामी रैकेट का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। युवक के अनुसार, म्यांमार के सुदूरवर्ती और अशांत इलाके में उसके साथ करीब 700 से 800 निर्दोष भारतीयों को बंधक (Hostage) बनाकर रखा गया है।
पीड़ित युवक ने अपने परिवार को रोते हुए बताया कि जो भी भारतीय नागरिक वहां की अवैध विधिक और अमानवीय शर्तों के अनुसार काम करने से मना करते हैं, उन्हें बिजली के झटके (Electric Shocks) दिए जाते हैं और भूखा रखकर बेरहमी से पीटा जाता है।
1. ऑनलाइन नौकरी का झांसा और साइबर फ्रॉड का विधिक जाल
इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) पूरी तरह डिजिटल और भ्रामक विधिक विधाओं पर टिकी है:
- ग्राफिक डिजाइनर को निशाना बनाया: बीड का रहने वाला यह पीड़ित युवक एक पेशेवर ग्राफिक डिजाइनर है। पिछले महीने (जून 2026) उसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन जॉब पोर्टल्स के जरिए एक नामी विदेशी कंपनी में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का झांसा दिया गया था।
- जबरन कराया जा रहा है अपराध: म्यांमार की सीमा में प्रवेश कराते ही तस्करों ने उसका विधिक पासपोर्ट और दस्तावेज छीन लिए। इसके बाद उसे एक सुरक्षित और बंद कैंप में रखकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) और ऑनलाइन स्कैम करने के लिए विधिक रूप से मजबूर किया जाने लगा।
2. म्यांमार में बंधकों की दर्दनाक विधिक स्थिति
कैंप के भीतर का खौफनाक ढांचा बंधकों की संख्या:थर्ड-डिग्री टॉर्चर:विधिक विवशता:विभिन्न भारतीय राज्यों के लगभग **700 से 800 युवक** वहां कैद हैं।टारगेट पूरा न होने या विरोध करने पर बिजली के झटके और अमानवीय शारीरिक यातनाएं।भारतीयों के विधिक पहचान पत्रों को जब्त कर उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है।
3. विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों से विधिक गुहार
युवक की इस भयावह आपबीती को सुनने के बाद बीड में रह रहे उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के माध्यम से भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और म्यांमार में स्थित भारतीय दूतावास से इन सभी असहाय नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कराने और अंतरराष्ट्रीय तस्करों के खिलाफ सख्त विधिक व कूटनीतिक कार्रवाई करने की लिखित गुहार लगाई है।
विधिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (जैसे म्यांमार, कंबोडिया और लाओस) में ‘साइबर अपराध सिंडिकेट’ द्वारा भारतीय तकनीकी युवाओं को निशाना बनाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिसके लिए सरकार को एक कड़ा विधिक परामर्श (Advisory) जारी करने की तत्काल आवश्यकता है।

