कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने मंगलवार को संकेत दिया कि पंचायत स्तर पर होने वाले वित्तीय लेन-देन और भुगतान की प्रक्रिया अब प्रधानों के बजाय पंचायत सचिवों और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार पंचायत कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है। संभावना है कि 17 से 25 जुलाई तक चलने वाले विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण में इससे संबंधित विधेयक पेश किया जाएगा।
दिलीप घोष ने कहा कि पंचायतों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण अक्सर सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक पंचायतों के तहत संचालित विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं में धनराशि जारी करने तथा भुगतान की शक्ति पंचायत प्रधानों के पास होती थी।
वित्तीय अनुशासन बढ़ाने पर जोर
कई मामलों में धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भुगतान और वित्तीय स्वीकृति की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में होगी। सरकार का मानना है कि इससे वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।
पुरानी व्यवस्था पर उठे थे सवाल
पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान पंचायतों को लेकर भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए थे। प्रधानमंत्री आवास योजना और 100 दिन रोजगार योजना में कथित अनियमितताओं, फर्जी लाभार्थियों और धन के दुरुपयोग के आरोपों ने पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। नई सरकार का मानना है कि वित्तीय अधिकारों के पुनर्वितरण और प्रशासनिक निगरानी बढ़ने से ऐसी शिकायतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

