99 फीसदी कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में भाजपा सांसद और विधायक बने अध्यक्ष, सरकार ने किया बचाव
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के 247 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों और विधायकों की व्यापक नियुक्ति को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, लगभग 99 फीसदी कॉलेजों में स्थानीय भाजपा विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को गवर्निंग बॉडी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इस फैसले के बाद विपक्षी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर तीखा हमला बोला है।
टीएमसी का आरोप: कथनी और करनी में अंतर टीएमसी नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और विधायक कुणाल घोष ने सरकार पर ‘दोहरी नीति’ अपनाने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री ने पहले शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक दखल से पूरी तरह मुक्त रखने और पिछली व्यवस्था को बदलने का वादा किया था, लेकिन अब कॉलेजों की कमान सीधे तौर पर पार्टी नेताओं को सौंपी जा रही है। अधिसूचना के तहत स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय को ईस्ट कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज और अग्निशमन सेवा राज्य मंत्री कौशिक चौधरी को रायगंज बीएड कॉलेज की जिम्मेदारी दी गई है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने किया नियुक्तियों का बचाव विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने इन नियुक्तियों को सही ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कॉलेज प्रशासन में शामिल करने का अर्थ शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक अखाड़ा बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी जांच-पड़ताल के बाद की गई है और इसका उद्देश्य सिर्फ प्रशासनिक निगरानी को बेहतर बनाना है।

