नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (9 जून 2026) को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान देश के सीमा प्रबंधन में ऐतिहासिक सुधार करते हुए डिजिटल ‘लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (Land Port Management System) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इस अवसर पर गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर कई महत्वपूर्ण आंकड़े और रणनीतिक ब्लूप्रिंट देश के सामने रखे। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के सफल कार्यकाल के दौरान भारत का लैंड पोर्ट व्यापार रिकॉर्ड 16 गुना बढ़ा है, जो साल 2014 के महज 5,000 करोड़ रुपये के मुकाबले अब 83,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
कागजी प्रक्रिया का होगा अंत; 40 से 60 प्रतिशत समय की होगी बचत
गृह मंत्री अमित शाह ने नए डिजिटल सिस्टम की तकनीकी खूबियां बताते हुए कहा कि ‘लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ के पूरी तरह क्रियान्वित होने से सीमाओं पर होने वाला 90 प्रतिशत (90%) कामकाज, जो अभी तक पारंपरिक कागजी फाइलों और जटिल मैन्युअल प्रक्रियाओं के जरिए होता था, अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत एक ‘सिंगल इलेक्ट्रॉनिक विंडो’ (Single Electronic Window) प्रणाली लागू की गई है। इस अत्याधुनिक डिजिटल व्यवस्था के कारण लैंड पोर्ट्स पर विभिन्न स्वीकृतियों, कार्गो क्लीयरेंस और जांच प्रक्रिया में लगने वाले समय में 40% से 60% तक की भारी बचत होगी, जिससे सीमा पार व्यापार अधिक सुगम और तीव्र हो जाएगा।
UIDAI, CBIC और BSF सहित कई सुरक्षा एजेंसियां एक मंच पर साझा करेंगी रियल-टाइम डेटा
देश की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए इस सिस्टम के माध्यम से एक अभूतपूर्व एकीकरण (Integration) किया गया है। अब ‘लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ के एकल प्लेटफॉर्म पर देश की तमाम बड़ी सुरक्षा, रेगुलेटरी और लॉजिस्टिक्स एजेंसियां एक साथ जुड़ गई हैं:
- सुरक्षा एवं सीमा बल: सीमा सुरक्षा बल (BSF)
- पहचान एवं सत्यापन: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI)
- राजस्व एवं कस्टम्स: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और आईसीईगेट (ICEGATE)
- व्यापार एवं परिवहन: विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), मोटर वाहन प्रणाली और यूएलआईपी (ULIP)
ये सभी एजेंसियां अब एक ही मंच पर रियल-टाइम डेटा (Real-Time Data) साझा करेंगी। शाह ने कहा कि ऐसा होने से सीमा पर तैनात विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और ज्यादा मजबूत होगा।
अगले 3 वर्ष में विकसित होंगे 11 नए लैंड पोर्ट; स्मार्ट बॉर्डर योजना
गृह मंत्री ने भारत के सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विस्तार की घोषणा करते हुए कहा, “देश में फिलहाल 15 लैंड पोर्ट पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अगले 3 वर्षों के भीतर 11 और नए आधुनिक लैंड पोर्ट विकसित करने की एक व्यापक योजना तैयार की है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ और ‘स्मार्ट बॉर्डर’ (Smart Border) योजना के इस नए डिजिटल आधार के जरिए देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ बनाया जाएगा। इस आधुनिक सीमा तंत्र के चलते सीमाओं के पार होने वाली हर प्रकार की अवैध गतिविधियों, तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी और एक पूरी तरह ‘सुरक्षित एवं पारदर्शी व्यवस्था’ का निर्माण सुनिश्चित होगा।
पलायन रोकने का साधन और सुरक्षा कवच हैं लैंड पोर्ट्स
सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि लैंड पोर्ट केवल दो देशों के बीच व्यापार का माध्यम भर नहीं हैं, बल्कि ये देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच, पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक संपर्क का पुल और सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने का एक अत्यंत प्रभावी साधन हैं। इन पोर्ट्स के सक्रिय होने से सीमावर्ती जिलों में पलायन का दबाव कम हो रहा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। लैंड पोर्ट अथॉरिटी अब भारत की ‘चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा रणनीति’ के सबसे प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रही है, जहां कार्गो, वाहनों और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच का पूरा समन्वय अब केवल एक ही प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद रहेगा।

