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Wednesday, June 3, 2026

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बंगाल फर्जी सिग्नेचर विवाद: सीआईडी को मिली तीन टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर के नमूने (Handwriting Specimen) लेने की कोर्ट से मंजूरी; जांच तेज

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों के प्रस्ताव पत्र पर किए गए कथित जाली हस्ताक्षरों (फर्जी सिग्नेचर) का विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। मामले की गहराई से जांच कर रही राज्य पुलिस की अपराध जांच विभाग (CID) को मंगलवार (2 जून 2026) को बैंकशाल कोर्ट से एक बड़ी सफलता मिली है। अदालत ने सीआईडी को मामले में नामजद तीन टीएमसी विधायकों— बहरुल इस्लाम, सुभाषिस दास और अरूप रॉय के हस्ताक्षर के नमूने (Specimen Signatures) लेने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

DIG की अगुवाई में 5 सदस्यीय विशेष टीम गठित; शिकायतकर्ता विधायक ही पार्टी से निष्कासित

इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी ने एक डीआईजी (DIG) रैंक के शीर्ष अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। यह पूरी जांच कोलकाता के हरे स्ट्रीट थाने में दर्ज उस मूल प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है, जिसे राज्य विधानसभा सचिव ने आधिकारिक तौर पर दर्ज कराया था।

दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए अपने दो मौजूदा विधायकों— ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलासा किया कि विधानसभा में फर्जीवाड़े की शिकायत करने वाले भी यही दोनों विधायक थे।

कैसे शुरू हुआ विवाद? 6 और 19 मई की बैठकों का पूरा गणित

इस पूरे सियासी विवाद की जड़ें हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों (4 मई) के बाद से जुड़ी हैं:

  • 6 मई की बैठक: नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर नेता प्रतिपक्ष, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन को लेकर पेंच फंस गया था। ममता बनर्जी ने कालीघाट आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें सर्वसम्मति से तय हुआ कि इन पदों का फैसला ममता बनर्जी स्वयं करेंगी।
  • अभिषेक बनर्जी के पत्र पर आपत्ति: इसके बाद शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंधोपाध्याय व अशीमा पात्रा को उपनेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक घोषित करते हुए महासचिव अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा भेजा गया। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह चयन संसदीय दल की आधिकारिक बैठक में लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए था, न कि किसी एकल पत्र के जरिए।
  • 19 मई की बैठक में जालसाजी का आरोप: पत्र खारिज होने के बाद 19 मई को दोबारा कालीघाट में बैठक बुलाई गई। आरोप है कि इस बैठक में विधायकों से पिछली बैठक (6 मई) के मिनट्स (सदन की कार्यवाही के विवरण) पर जबरन या धोखे से हस्ताक्षर करवाए गए, जिसमें कुछ विधायकों के जाली दस्तखत किए जाने की शिकायत सामने आई।

अभिषेक बनर्जी समेत कई दिग्गजों पर सीआईडी का शिकंजा

मामले को हाथ में लेते ही सीआईडी की टीम एक्शन मोड में है। जांच अधिकारियों ने अब तक नयना बंधोपाध्याय, कुणाल घोष, तापस मैती और बहरुल इस्लाम सहित चार बड़े विधायकों के आवासों पर जाकर सीधे पूछताछ की है। इसी सिलसिले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को भी सोमवार को भवानी भवन तलब किया गया था, लेकिन उन्होंने सोनारपुर में हुए कथित हमले और खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर पेश होने के लिए 15 दिनों की मोहलत मांगी है, जिसके बाद सीआईडी ने उन्हें 8 जून का दूसरा कड़ा समन थमाया है।

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