कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार में मंत्रियों के विभागों के आवंटन (Portfolio Allocation) की आधिकारिक घोषणा को फिलहाल टाल दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में पहले यह मजबूत संभावना जताई जा रही थी कि बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों के मंत्रालयों की सूची साफ हो जाएगी, लेकिन अब इसके 5 जून 2026 को सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।
तकनीकी कारणों से टला आवंटन; कैबिनेट की तीसरी बैठक में नहीं बनी बात
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नई सरकार की तीसरी महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में नवनियुक्त मंत्रियों के विभागों की रूपरेखा पर गहन चर्चा तो हुई, लेकिन कुछ अपरिहार्य तकनीकी और रणनीतिक कारणों से मंत्रालयों की अंतिम सूची पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी। जिसके बाद सर्वसम्मति से इस फैसले को दो दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया।
उल्लेखनीय है कि बीते 1 जून को राजभवन (लोक भवन) में आयोजित एक भव्य समारोह में 35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी, जिसमें 13 कैबिनेट मंत्री, 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 19 राज्य मंत्री शामिल थे। इस बड़े विस्तार के बाद अब बंगाल मंत्रिपरिषद की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इससे पहले 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित 6 मंत्रियों ने शुरुआती शपथ ली थी।
कैबिनेट मंत्रियों की संख्या हुई 19; अभी भी 3 पद खाली
13 नए दिग्गजों के शामिल होने के बाद अब सूबे में मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट रैंक के मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 19 हो गई है। भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या कुल सीटों का 15 प्रतिशत यानी 44 हो सकती है। इस लिहाज से शुभेंदु सरकार में अभी भी तीन (3) और नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की संवैधानिक गुंजाइश बची हुई है।
वित्त और उद्योग मंत्रालय पर टिकी नजरें; नंदीग्राम सीट से छिड़ा बड़ा सस्पेंस
वर्तमान में सबसे बड़ी उत्सुकता इस बात को लेकर है कि कर्ज के दलदल में डूबे पश्चिम बंगाल के वित्त (Finance) और उद्योग एवं वाणिज्य (Industry & Commerce) जैसे अति-महत्वपूर्ण विभाग किस कद्दावर चेहरे को सौंपे जाएंगे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को सत्ता संभालते ही साफ कर दिया था कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य की बदहाल आर्थिक स्थिति को सुधारना और बड़े कॉर्पोरेट निवेश को आकर्षित करना है।
भाजपा के शीर्ष सांगठनिक सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री फिलहाल वित्त मंत्रालय का प्रभार अपने पास ही सुरक्षित रख सकते हैं। पार्टी के भीतर एक बेहद चौंकाने वाली योजना पर मंथन चल रहा है, जिसके तहत दिल्ली के एक बेहद प्रतिष्ठित बंगाली अर्थशास्त्री को नंदीग्राम विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़वाकर सीधे कैबिनेट में एंट्री दी जाएगी और बाद में उन्हें पूर्णकालिक वित्त मंत्री की कमान सौंपी जाएगी।
आपको बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों हाई-प्रोफाइल सीटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। भवानीपुर में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक वोटों से मात दी थी। चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया, जिसके कारण उनके इस्तीफे से खाली हुई नंदीग्राम सीट पर अब उपचुनाव होना तय है, जहाँ से भाजपा किसी बड़े चेहरे को उतारने की तैयारी में है।

