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Tuesday, May 5, 2026

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बंगाल चुनाव 2026: शांतिपूर्ण मतदान के पीछे ‘वन इलेक्शन फोर्स’ और सीआरपीएफ की विशेष रणनीति

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद, इस बार की सबसे बड़ी उपलब्धि “शांतिपूर्ण मतदान” को माना जा रहा है। बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब बड़े पैमाने पर हिंसा की खबरें नहीं आईं। इस सफलता के पीछे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की ‘वन इलेक्शन फोर्स’ रणनीति और विशेष रूप से CRPF के शीर्ष नेतृत्व की जमीनी मौजूदगी ने अहम भूमिका निभाई।

यहाँ इस सुरक्षा चक्र की कुछ खास बातें दी गई हैं:

1. जीपी सिंह और वितुल कुमार: ‘ग्राउंड जीरो’ पर डटी रही जोड़ी

चुनाव आयोग और सुरक्षा गलियारों में सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह और एसडीजी वितुल कुमार की जोड़ी चर्चा का विषय बनी रही।

  • दो सप्ताह का प्रवास: अन्य बलों के महानिदेशकों के दौरे संक्षिप्त रहे, लेकिन ये दोनों अधिकारी दो सप्ताह से अधिक समय तक बंगाल में ही डेरा डाले रहे।
  • जवानों का हौसला: दोनों अफसर ‘मार्क्समैन’ बुलेटप्रूफ बख्तरबंद वाहनों में बैठकर बूथ-दर-बूथ घूमते रहे और जवानों के साथ सीधे संवाद किया।
  • कर्तव्य को प्राथमिकता: वे अपनी व्यस्तता के कारण सीआरपीएफ अकादमी में 56वें बैच की पासिंग आउट परेड में भी शामिल नहीं हो सके, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो।

2. ‘वन इलेक्शन फोर्स’ की ताकत

इस चुनाव में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग पहचान के बजाय एक एकीकृत इकाई के रूप में काम किया:

  • नफरी: कुल 2 लाख 40 हजार जवान तैनात किए गए, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी सीआरपीएफ की थी।
  • क्यूआरटी (QRT): 4000 से ज्यादा ‘क्विक रिस्पांस टीमें’ तैनात थीं, जो किसी भी सूचना पर मिनटों में पहुंचने में सक्षम थीं।
  • बख्तरबंद गाड़ियां: 300 से अधिक बख्तरबंद वाहनों के जरिए फ्लैग मार्च किया गया, जिससे उपद्रवियों में डर और वोटरों में विश्वास पैदा हुआ।

3. अभेद्य सुरक्षा तंत्र और तकनीक

  • कंट्रोल रूम: कोलकाता में मल्टी-सीएपीएफ कंट्रोल रूम बनाया गया, जिसने राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाया।
  • सार्वजनिक नंबर: पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए क्यूआरटी और कंट्रोल रूम के नंबर सार्वजनिक किए गए, ताकि आम नागरिक सीधे मदद मांग सकें।
  • कोऑर्डिनेशन: सीआरपीएफ आईजी शलभ माथुर को ‘स्टेट पुलिस कोऑर्डिनेटर’ बनाया गया, जिन्होंने स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच सेतु का काम किया।

4. अन्य महानिदेशकों की भूमिका

भले ही सीआरपीएफ का नेतृत्व फ्रंटलाइन पर रहा, लेकिन अन्य बलों के प्रमुखों ने भी सुरक्षा की कमान संभाली:

  • बीएसएफ डीजी प्रवीण कुमार, एसएसबी डीजी संजय सिंघल, सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन और आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कूपर ने भी संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा किया और फ्लैग मार्च के जरिए जनता का भरोसा जीता।

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