703 गांवों में अब भी भरा है पानी, राहत-बचाव के लिए 86 टीमें तैनात और ₹167.55 करोड़ का फंड जारी
भुवनेश्वर: पहले से ही बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ओडिशा में एक बार फिर मूसलाधार बारिश का संकट गहरा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में रविवार तक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ 29 अगस्त की सुबह तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, म्यांमार तट से उठा चक्रवाती परिसंचरण अब उत्तरी बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो चुका है। भारी बारिश की आशंका को देखते हुए मछुआरों को 22 से 24 अगस्त तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
7 जिलों के 14 लाख लोग प्रभावित, राहत कार्य तेज हालिया बाढ़ के कारण बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों में करीब 14 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। यद्यपि प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन चार जिलों के 703 गांव अब भी जलमग्न हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, ओड्राफ (ODRAF) और अग्निशमन विभाग की कुल 86 टीमें मैदान में उतारी गई हैं। राज्य सरकार ने तीन चरणों में 167.55 करोड़ रुपये का एसडीआरएफ फंड जारी किया है।
स्कूल बंद, जलभराव और बीमारियों से निपटने की तैयारी मयूरभंज और क्योंझर में संभावित बारिश से जालका और बुधबलंगा नदियों में पुनः उफान आने की आशंका है। सुरक्षा के मद्देनजर जाजपुर और भद्रक में स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों और महामारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।

