वैश्विक संकटों और अनिश्चितताओं के बीच भारत बना ‘ब्राइट स्पॉट’; ईज ऑफ लिविंग पर सरकार का मुख्य फोकस
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में नीति और शासन (Governance) के स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधार निरंतर जारी हैं। उन्होंने प्रशासनिक मानसिकता में आए ऐतिहासिक बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब पुरानी नियंत्रणकारी व्यवस्था से निकलकर विकास और सुगमता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
पीएम मोदी ने बताया कि पहले की व्यवस्था का नजरिया ‘प्रोहिबिटेड अनलेस परमिट’ (जब तक अनुमति न मिले तब तक प्रतिबंधित) का था, जिसे बदलकर अब सरकार ने ‘परमिटेड अनलेस प्रोहिबिटेड’ (जब तक कानूनन रोक न हो तब तक अनुमति) की प्रगतिशील सोच में तब्दील कर दिया है।
वैश्विक चिंताओं के बीच भारत कैसे बना ‘ब्राइट स्पॉट’?
प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक हालात का विश्लेषण करते हुए भारत की स्थिति स्पष्ट की:
- वैश्विक अनिश्चितताएं: वर्तमान समय में दुनिया भर में विकास दर को लेकर गहरी चिंताएं हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
- विकास का ब्राइट स्पॉट: ऐसे अस्थिर वैश्विक माहौल के बावजूद मजबूत आर्थिक नीतियों और नीतिगत स्थिरता के दम पर भारत दुनिया के लिए विकास का एक प्रमुख ‘ब्राइट स्पॉट’ बनकर उभरा है।
- ईज ऑफ लिविंग पर जोर: सरकार का प्राथमिक उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़ों में वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को सुगम (Ease of Living) बनाना और प्रक्रियाओं को सरल करना है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव
| व्यवस्था का स्वरूप | पूर्व की स्थिति | वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| नियामकीय मानसिकता | Prohibited Unless Permitted (अनुमति मिलने तक सब प्रतिबंधित) | Permitted Unless Prohibited (कानूनी रोक न होने तक सब अनुमत) |
| सुधारों का दायरा | तात्कालिक और टुकड़ों में फैसले | दीर्घकालिक विजन और ‘नेक्स्ट जेनरेशन’ नीतिगत सुधार |
| प्रशासनिक रुख | नियंत्रण और लालफीताशाही | नागरिकों व उद्योगों के लिए सुगमता और विश्वास-आधारित शासन |

