सुरक्षा गार्ड पर बुर्का उतारने का दबाव बनाने का आरोप; AIMIM, कांग्रेस और NCP ने जताई कड़ी आपत्ति
मुंबई: मुंबई स्थित बीएमसी संचालित कूपर अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में बुर्का पहनकर पहुंचीं दो महिलाओं को कथित तौर पर प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिलाओं ने अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों पर जबरन बुर्का उतारने के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद गहरा गया है। जहां विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, वहीं मुंबई की मेयर ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
‘बच्चा चोरी का हवाला देकर बुर्का हटाने को कहा’: पीड़िता जहांआरा शेख एआईएमआईएम (AIMIM) मुंबई की उपाध्यक्ष और अधिवक्ता जहांआरा शेख ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह रविवार को अस्पताल में भर्ती अपनी एक रिश्तेदार से मिलने गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटरनिटी वार्ड के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उनसे बुर्का उतारकर अंदर जाने को कहा।
जहांआरा शेख के अनुसार, जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो सुरक्षा गार्ड ने तर्क दिया कि ‘बुर्का पहनकर आने वालों की वजह से बच्चे चोरी होने का खतरा रहता है।’ इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा, “यदि सुरक्षा को लेकर कोई संशय है, तो यह अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा विफलता है। अस्पताल को मेटरनिटी वार्ड में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर पहचान की जांच करनी चाहिए, न कि महिलाओं को बुर्का उतारने के लिए मजबूर करना चाहिए। यह मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और प्रशासन का रुख इस घटना को लेकर एनसीपी (NCP), कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेताओं ने अस्पताल प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की है।
- मेयर का आश्वासन: मुंबई की मेयर ने पूरे घटनाक्रम को अनुचित बताते हुए कहा कि मामले की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जांच में दोषी पाए जाने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- शिवसेना का पक्ष: शिवसेना ने जहां एक ओर नागरिकों के व्यक्तिगत पहनावे और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में मरीजों और नवजातों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

