दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में सक्षम; मुंबई नेवल डॉक में हुआ औपचारिक समारोह
मुंबई: भारतीय नौसेना की मारक और निगरानी क्षमता को और सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत ‘मंगरोल’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। 12 अक्तूबर को आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान यह युद्धपोत आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना का अभिन्न हिस्सा बन गया। ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत निर्मित यह लड़ाकू जहाज पानी के भीतर छिपे खतरों से निपटने और देश की समुद्री सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह नया युद्धपोत विशेष रूप से दुश्मन की आधुनिक पनडुब्बियों की टोह लेने और उनका सटीक पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की उन्नत तकनीक से लैस है। इसके साथ ही, यह उथले समुद्री क्षेत्रों (शैलो वाटर्स) में भी तीव्र गति से गश्त लगाने और त्वरित सैन्य कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे तटीय इलाकों की सुरक्षा को कई गुना मजबूती मिलेगी।
युद्धपोत ‘मंगरोल’ के जलावतरण एवं कमीशनिंग का मुख्य समारोह मुंबई स्थित ऐतिहासिक नेवल डॉकयार्ड में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने की।
इस अवसर पर नौसेना और रक्षा क्षेत्र के कई उच्चाधिकारी, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा युद्धपोत का निर्माण करने वाली कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा, समारोह में पूर्व नौसैनिक अधिकारी और स्वदेशी हथियार व उन्नत सेंसर प्रणालियों का विकास करने वाले रक्षा उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञ भी सम्मिलित हुए।

