87:13 फॉर्मूला 8 साल पुराना नहीं, 2022 में जीएडी के परिपत्र के बाद लागू हुई थी व्यवस्था
इंदौर: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर दिए गए बयानों पर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ‘झूठ की गूंज’ नामक हैंडल द्वारा किए गए एक विस्तृत फैक्ट-चेक में राहुल गांधी के इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार करार दिया गया है।
4.87 लाख पद लंबित होने के दावे को बताया तथ्यहीन फैक्ट-चेक पोस्ट के अनुसार, राहुल गांधी का यह सार्वजनिक दावा पूरी तरह से भ्रामक है कि बीते आठ वर्षों के दौरान एमपीपीएससी की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 13 प्रतिशत पदों को रोक दिया गया है, जिसके चलते 4.87 लाख सरकारी पद लंबित पड़े हैं। पोस्ट में आधिकारिक दस्तावेजों और नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखने की यह व्यवस्था आठ साल पुरानी है ही नहीं, इसलिए इतने लंबे समय से लाखों पदों के रुके होने का आरोप तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सही नहीं ठहरता।
2022 में लागू हुआ था 87:13 का फॉर्मूला, 2019 से जुड़ा है विवाद तथ्यों का ब्योरा देते हुए बताया गया है कि मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 87:13 व्यवस्था से संबंधित औपचारिक परिपत्र 29 सितंबर 2022 को जारी किया था। ऐसे में इस व्यवस्था को पिछले आठ वर्षों की सभी पूर्ववर्ती भर्तियों पर लागू मानना सरासर गलत है। फैक्ट-चेक के मुताबिक, इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के उस निर्णय में हैं, जिसके तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाने के बाद भर्ती परीक्षाओं के परिणामों को सुचारू रखने के लिए 87 प्रतिशत मुख्य भाग और 13 प्रतिशत प्रावधिक भाग की यह अंतरिम व्यवस्था बनाई गई थी।

