राष्ट्रपति भवन में लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस का भव्य स्वागत, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर दिया बल
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को भारत और यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन के बीच तकनीकी, आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत करने का पुरजोर आह्वान किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के मध्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वैज्ञानिक अनुसंधान, कौशल विकास और स्वच्छ तकनीक जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक और असीम संभावनाएं विद्यमान हैं।
राष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक आवास राष्ट्रपति भवन में लिकटेंस्टीन के वंशानुगत प्रिंस एलोइस, उनकी धर्मपत्नी प्रिंसेस सोफी और उनके साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। इस राजकीय यात्रा के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति भवन में शाही दंपति और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के सम्मान में एक विशेष औपचारिक रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया।
मुलाकात के दौरान बातचीत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच दोनों राष्ट्रों के संबंधों को नए आयाम देना पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को अब उन्नत तकनीकी और नवाचार साझेदारी में परिवर्तित करने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
विशेष रूप से सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में लिकटेंस्टीन की विशेषज्ञता और भारत के विशाल बाजार व प्रतिभा का बेहतरीन तालमेल स्थापित किया जा सकता है। इससे दोनों देशों के उद्योगों, युवाओं और शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और आगे बढ़ने का सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक के समापन पर दोनों पक्षों ने उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद, व्यापारिक निवेश और जन-जन के संपर्क को निरंतर बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस यात्रा से भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य लिकटेंस्टीन के बीच व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ कूटनीतिक सहयोग को भी एक नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद है।

