ओबेरॉय होटल में 100 दिन ठहरने पर भी उठाए सवाल; जमानत पर अंतरिम रोक 14 अक्तूबर तक बढ़ाई
मुंबई: बर्खास्त पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके विलासितापूर्ण जीवन, महंगी गाड़ियों और भारी-भरकम खर्चों को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस बात पर कड़ा आश्चर्य जताया कि लगभग 90,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाला एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (एपीआई) स्तर का पुलिसकर्मी मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी करोड़ों रुपये की लग्जरी गाड़ियों का नियमित इस्तेमाल कैसे कर सकता था। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा वाजे को दी गई जमानत पर लगी अंतरिम रोक को 14 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष एनआईए अदालत के 29 सितंबर के जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने मामले में दर्ज गवाहों के बयानों का ब्योरा अदालत के समक्ष रखा, जिसमें वाजे द्वारा महंगी और विलासितापूर्ण कारों के नियमित उपयोग की पुष्टि की गई थी।
अदालत ने गवाहों के बयानों का संज्ञान लेते हुए सीधे तौर पर पूछा कि एक एपीआई स्तर का अधिकारी इतनी महंगी गाड़ियों का रखरखाव और ईंधन खर्च अपनी घोषित आय से कैसे उठा सकता था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी रिकॉर्ड पर लाया गया कि सचिन वाजे मर्सिडीज कार से अपने आधिकारिक दफ्तर जाया करते थे, जो पुलिस आयुक्त कार्यालय वाली इमारत में ही स्थित था। इतना ही नहीं, इसी लग्जरी वाहन से उनके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ बंगले जाने की बात भी सामने आई।
अदालत ने इसके अलावा मुंबई के आलीशान पांच सितारा ओबेरॉय होटल में वाजे के 100 से अधिक दिनों तक लगातार ठहरने और उस पर हुए लाखों रुपये के भारी खर्च पर भी कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने पूछा कि इस लंबे और खर्चीले प्रवास के लिए भुगतान किसने और किस मकसद से किया था। मामले में एनआईए की दलीलों और वाजे की जीवनशैली से जुड़े इन अनुत्तरित सवालों के मद्देनजर पीठ ने जमानत पर लगी रोक को 14 अक्तूबर तक बरकरार रखते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया।

