कोलकाता, 5 मई 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा की प्रचंड जीत (207 सीटें) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार (80 सीटें) के बाद राज्य में संवैधानिक संकट और जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अभी अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी, जिस पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ममता बनर्जी का पक्ष: “हम हारे नहीं हैं” हार के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा:
- इस्तीफे पर रुख: “मैं क्यों इस्तीफा दूं? हम चुनाव हारे ही नहीं हैं। अगर हार का सबूत मिलता तो बात अलग थी। जबरदस्ती कोई कहेगा तो मैं पद नहीं छोड़ूंगी।”
- चुनाव आयोग पर हमला: उन्होंने चुनाव आयोग को हार के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उसे ‘मुख्य विलेन’ करार दिया।
- भविष्य की रणनीति: ममता ने एलान किया कि वे अब भाजपा के ‘अत्याचार’ के खिलाफ सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगी।
भाजपा का पलटवार: “खुद को हास्यास्पद बना रही हैं दीदी” ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता देबजीत सरकार ने पलटवार करते हुए कहा:
- संवैधानिक मर्यादा: “संविधान में विश्वास करने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी बातें नहीं कर सकता। जनादेश स्पष्ट है, लेकिन वे इसे स्वीकार करने के बजाय खुद को हास्यास्पद बना रही हैं।”
- प्रचार की भूख: भाजपा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी हार के बाद भी सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के अतार्किक बयान दे रही हैं।
संविधान क्या कहता है? संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई मुख्यमंत्री सदन में बहुमत खो देता है या चुनाव में उसकी पार्टी हार जाती है, तो उसे नैतिक और कानूनी आधार पर इस्तीफा देना होता है। यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देता है, तो:
- राज्यपाल की भूमिका: राज्यपाल मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं।
- बहुमत साबित करना: यदि मुख्यमंत्री दावा करें कि उनके पास बहुमत है, तो उन्हें सदन के पटल पर इसे साबित करना होगा (जो कि 80 सीटों के साथ टीएमसी के लिए असंभव है)।
- बर्खास्तगी: अंततः, राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने और नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त करने की शक्ति होती है।

