नई दिल्ली: देश के कुछ हिस्सों में जून के महीने में सामान्य से कम बारिश और उसके कारण उत्पन्न संभावित सूखे (Drought-like situation) की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
बैठक के दौरान गृह मंत्री ने सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने तथा खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर किसानों को समय पर विधिक व कृषि-तकनीकी सलाह देने के लिए राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया।
1. अल नीनो की आशंका और कम बारिश पर गृह मंत्री का विधिक व रणनीतिक रुख
बैठक में अल नीनो (El Nino) के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम हुई बारिश और उसके संभावित कृषि व सामाजिक प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई:
- निगरानी का विधिक निर्देश: अमित शाह ने आधिकारिक रूप से कहा, “सरकार अल नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। ऐसे में अधिकारी राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसलें बोने की सलाह दें।”
- जून के सूखे आंकड़े: जून के महीने में देशभर में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक और चिंताजनक असर मध्य भारत में देखने को मिला, जहां वर्षा में 50.4 प्रतिशत की भारी कमी रही। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, जुलाई में भी औसत मासिक वर्षा सामान्य से कम रहने की विधिक व तकनीकी संभावना है।
2. खरीफ की बुवाई पर पड़ा असर (आंकड़े)
$$\text{खरीफ बुवाई और खाद्यान्न की स्थिति} \begin{cases} \text{रकबे में गिरावट:} & \text{कम बारिश के चलते 25 जून तक खरीफ फसलों का रकबा **23 प्रतिशत घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर** रह गया।} \\ \text{कम पानी की फसलें:} & \text{सरकार अब चारा, मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों जैसी कम पानी में उगाई जाने वाली वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित कर रही है।} \\ \text{खाद्यान्न बफर स्टॉक:} & \text{अमित शाह ने स्पष्ट किया कि देश में चावल और गेहूं सहित आवश्यक खाद्यान्नों का **पर्याप्त भंडार (Buffer Stock)** उपलब्ध है।} \\ \text{मूल्य स्थिरता:} & \text{बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें फिलहाल पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं और जमाखोरी पर विधिक नजर है।} \end{cases}$$
3. जल और बिजली मंत्रालयों को मिले कड़े विधिक निर्देश
कृषि संकट को टालने के लिए गृह मंत्री ने बिजली और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट विधिक जवाबदेही सौंपी है:
- जलाशयों की मॉनिटरिंग: जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे देशभर के सभी प्रमुख जलाशयों (Reservoirs) के जलस्तर पर लगातार नजर रखें ताकि सिंचाई के लिए पानी का विधिक नियोजन किया जा सके।
- निर्बाध बिजली आपूर्ति: बिजली सचिव को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के लिए पंपसेट चलाने हेतु तथा आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध (Uninterrupted) एवं पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तुरंत आवश्यक वित्तीय व तकनीकी कदम उठाएं।
4. असम और अरुणाचल के लिए IMCT टीम रवाना करने का आदेश
एक तरफ जहां देश का एक हिस्सा सूखे की आशंका से जूझ रहा है, वहीं पूर्वोत्तर भारत में अत्यधिक वर्षा का प्रकोप है। अमित शाह ने हाल ही में हुई भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) और भूस्खलन (Landslides) से हुए व्यापक नुकसान का मौके पर विधिक व तकनीकी आकलन करने के लिए गृह मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) को तत्काल असम और अरुणाचल प्रदेश भेजने का निर्देश दिया। असम के कई जिलों में वर्तमान में बाढ़ का पानी फैला हुआ है, जबकि अरुणाचल प्रदेश के कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हैं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह और कृषि सचिवों के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा बिजली, ग्रामीण विकास व उपभोक्ता मामलों के मंत्रालयों के सचिव विधिक रूप से शामिल हुए।

