चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले एक बहुत बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है। पूर्व कद्दावर आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भाजपा के पूर्व दिग्गज अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे का असर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़े पैमाने पर दिखने लगा है। अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने और एक नए राजनीतिक दल के गठन के एलान के महज कुछ ही घंटों के भीतर भाजपा में सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष के. नागराजन, प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश और करु नागराजन समेत पार्टी के 14 शीर्ष सांगठनिक पदाधिकारियों ने अपने पदों से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राज्य भाजपा इकाई पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है।
दिसंबर 2025 में ही दे दिया था संकेत; वैचारिक मतभेद बनी वजह
पार्टी से नाता तोड़ने के बाद अपने पहले आधिकारिक बयान में के. अन्नामलाई ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु के भविष्य और उसके राजनीतिक विकास को लेकर उनका जो नजरिया है, वह अब भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व के विचारों और नीतियों से मेल नहीं खा रहा था।
अन्नामलाई ने बताया, “मैंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी हाईकमान को अपने इस्तीफे के फैसले की लिखित जानकारी दे दी थी। हालांकि, भाजपा नेतृत्व के विशेष अनुरोध पर मैं राज्य के विधानसभा चुनाव अभियान को पूरा कराने के लिए अब तक पार्टी में रुका हुआ था।” उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक लक्ष्य अब ‘काफी बड़े’ हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए उन्हें एक ऐसे नए, पारदर्शी और समावेशी (Inclusive) मंच की जरूरत है, जहाँ समाज के हर वर्ग को बराबर का हक मिले।
अन्नामलाई की भविष्य की योजना: वंशवाद और व्यक्ति पूजा के खिलाफ जंग
सोशल मीडिया के जरिए जनता और अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अन्नामलाई ने अपनी भविष्य की रणनीतियों का खाका पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि वे बहुत जल्द एक नई राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करेंगे और भविष्य में तमिलनाडु की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा, “मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज भी दिल से बेहद सम्मान करता हूं। तमिलनाडु के कूटनीतिक दृष्टिकोण को लेकर पार्टी से मेरे मतभेद जरूर थे, लेकिन मैंने भाजपा को बेहद सौहार्दपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से छोड़ा है।”
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने साफ किया कि उनका नया राजनीतिक आंदोलन तमिलनाडु की पारंपरिक ‘व्यक्ति पूजा की राजनीति’ और भ्रष्टाचार की जननी ‘वंशवादी राजनीति’ को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित होगा। यह नया मंच तकनीकी विशेषज्ञों, पेशेवरों, युवाओं और आम नागरिकों को सीधे शासन व्यवस्था में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा। इस एलान के बाद पूरे राज्य में अन्नामलाई के समर्थकों ने पटाखे फोड़कर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।
नैनार नागेंद्रन ने दावों को किया खारिज: ‘भाजपा पर कोई असर नहीं’
दूसरी तरफ, अन्नामलाई के हटने के बाद तमिलनाडु भाजपा के नए अध्यक्ष बनाए गए नैनार नागेंद्रन ने इस संकट और चिंताओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। मीडिया से बात करते हुए नागेंद्रन ने कहा, “भाजपा एक व्यक्ति केंद्रित नहीं, बल्कि विचारधारा आधारित दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है। अन्नामलाई या किसी भी पदाधिकारी के जाने से पार्टी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लोकतंत्र में हर नागरिक को नई पार्टी बनाने का अधिकार है।”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा और एआईएडीएमके (AIIDMK) के बीच दोबारा चुनावी गठबंधन तय हुआ। अन्नामलाई के विवादित बयानों के चलते एआईएडीएमके के नेताओं से उनके रिश्ते बेहद तनावपूर्ण थे, जिसके कारण भाजपा आलाकमान ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया था। अब उपाध्यक्ष सहित 14 बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में भाजपा के कई जमीनी नेता और कार्यकर्ता अन्नामलाई के नए मोर्चे में शामिल हो सकते हैं।

